इस्लामाबाद/पेशावर, 28 सितंबर । खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में गवर्नर शासन लागू करने की केंद्र में बढ़ती मांग के बीच, पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने संघीय सरकार को इस कदम को आगे बढ़ाने की चुनौती दी है और चेतावनी भी दी कि इससे प्रांत में हालात और बिगड़ जाएंगे।
पार्टी नेता और पेशे से वकील नईम हैदर पंजुथा ने प्रमुख दैनिक 'डॉन' से बात करते हुए कहा, "आप पहले ही लोगों का जनादेश चुरा चुके हैं, उनसे उनका दो-तिहाई बहुमत और आरक्षित सीटें छीन चुके हैं, हजारों राजनीतिक रूप से प्रेरित मामले दर्ज कर चुके हैं, इमरान खान सहित हजारों लोगों को जेल में डाल चुके हैं, घरों पर छापे मार चुके हैं, चादर और चारदीवारी की पवित्रता का उल्लंघन कर चुके हैं, और बुशरा बीबी तथा इमरान खान की बहनों सहित महिलाओं को जेल में डाल चुके हैं।"
उन्होंने कहा कि सरकार को गवर्नर शासन लागू करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "आपको अंदाजा नहीं है कि केपी के लोग क्या कर सकते हैं। वे उठ खड़े होंगे और आपके गवर्नर शासन को उखाड़ फेंकेंगे।"
एक सवाल के जवाब में, पंजुथा ने कहा कि पीटीआई 'हकीकी आजादी' (सच्ची आजादी) के लिए अपने संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा, "हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक संवैधानिक सर्वोच्चता और कानून का शासन बहाल नहीं हो जाता, इमरान खान सहित सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा नहीं कर दिया जाता और लोगों के जनादेश का सम्मान नहीं किया जाता।"
उन्होंने कहा, "हमारा संघर्ष तब तक खत्म नहीं होगा जब तक पाकिस्तान 'रियासत-ए-मदीना' के विजन में शामिल न्याय, समानता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर नहीं चलता।"
पंजुथा ने दावा किया कि कोई भी धमकी, इमरजेंसी, गवर्नर शासन या राजनीतिक दमन पीटीआई के संकल्प को नहीं तोड़ सकता और न ही उनकी आजादी की लड़ाई को दबाया जा सकता है।
पीटीआई के सांसद शाहिद खट्टक ने भी ऐसी संसद में बने रहने के मकसद पर सवाल उठाया है, जो उनके अनुसार, अपने ही एमएनए (सांसदों) की गरिमा और सुरक्षा की रक्षा भी नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा, "ऐसी संसद में बैठने का क्या फायदा जो अपने ही एमएनए की गरिमा और सुरक्षा की रक्षा भी नहीं कर सकती?"
उन्होंने कहा, "मेरा प्रस्ताव है कि हम विधानसभाओं से इस्तीफा दें और अपने संघर्ष को सड़कों पर ले जाएं। हम गिरफ्तारी से नहीं डरते। हम गोलियों, बंदूकों या किसी भी तरह के दबाव से नहीं डरते। हम इमरान खान के सिपाही हैं। हर हाल में जनसभा होगी, और हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक इमरान खान रिहा नहीं हो जाते, राजनीतिक कैदी आजाद नहीं हो जाते, यह नाकाम सिस्टम बदल नहीं दिया जाता, और संविधान की सर्वोच्चता व कानून का शासन बहाल नहीं हो जाता।"
केपी के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने 25 सितंबर को पेशावर में मीडिया से बात करते हुए बताया था कि पीटीआई के विरोध मार्च से पहले प्रांत में गवर्नर शासन की संभावना पर बातचीत हुई थी। यह मार्च 27 सितंबर को होना था, लेकिन बाद में इसे 4 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया गया।












