छतरपुर। श्रावणी पर्व (रक्षाबंधन) के पावन अवसर पर छतरपुर के कर्मकांडी ब्राह्मणों ने शुक्रवार को विधि-विधान और वैदिक परंपराओं के अनुसार प्रायश्चित कर्म तथा आत्मशुद्धि का अनुष्ठान संपन्न किया। वर्षभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों व कर्मकांडों के दौरान जाने-अनजाने में हुई त्रुटियों व दोषों के निवारण के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया।
प्रताप सागर तालाब में पंचगव्य स्नान और मंत्रोच्चार
आत्मशुद्धि स्नान: ब्राह्मण समाज के आचार्यों ने शहर के ऐतिहासिक प्रताप सागर तालाब पहुँचकर मिट्टी, घी, दूध, दही और पंचगव्य से विधि-विधानपूर्वक स्नान कर शुद्धिकरण किया। पं. सौरभ तिवारी ने बताया कि प्रायश्चित कर्म के अंतर्गत सबसे पहले भगवान श्री गणेश का पूजन किया गया। इसके उपरांत सप्तर्षियों का विधिवत पूजन-अर्चन कर अनुष्ठान को आगे बढ़ाया गया। पं. शिवदत्त शुक्ला और पं. एस. लव पांडे के अनुसार, आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वेद अध्ययन, स्वाध्याय, ऋषि तर्पण और गायत्री जप का संकल्प लिया। इसके पश्चात पुरानी जनेऊ बदलकर विधिपूर्वक नवीन यज्ञोपवीत धारण किया गया।
धार्मिक महत्व और संकल्प
श्रावणी पर्व को आत्मशुद्धि, प्रायश्चित और वैदिक संस्कारों के नवीनीकरण का प्रमुख पर्व माना जाता है। इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों ने वर्षभर के कर्मकांड में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना करते हुए भविष्य में शुद्ध आचरण और धार्मिक कर्तव्यों के निष्ठापूर्वक पालन का संकल्प लिया।
अनुष्ठान में प्रमुख विद्वानों की उपस्थिति
इस धार्मिक अनुष्ठान में पं. ओमप्रकाश शर्मा, पं. अखिलेश पाठक, पं. प्रेमनारायण चतुर्वेदी, पं. राहुल पांडे, पं. बृज गोपाल तिवारी, पं. हरीश मिश्रा, पं. अवधेश दुबे, पं. द्रोणाचार्य द्विवेदी, पं. रमेश दीक्षित, पं. राजकुमार अवस्थी, पं. नरेश मिश्रा, पं. पंकज बाजपेई, पं. आशुतोष तिवारी, पं. प्रदीप मिश्रा, पं. आकाश पाठक, पं. सुरेंद्र कौशिक, पं. जितेंद्र मिश्रा और पं. कमल अवस्थी सहित लगभग आधा सैकड़ा कर्मकांडी ब्राह्मण शामिल रहे।




