छतरपुर, विनोद मिश्रा। अपनों को खोने का दर्द बेहद असहनीय होता है, लेकिन छतरपुर के सुंदरम कॉलोनी, तमराई मोहल्ला निवासी नीलेश ताम्रकर (63) के परिवार ने इस दुख की घड़ी को मानव सेवा की मिसाल में बदल दिया। लंबी बीमारी के बाद नीलेश ताम्रकर के निधन के पश्चात उनके परिजनों ने साहसिक निर्णय लेते हुए उनका नेत्रदान कराया। उनके इस निर्णय से दो नेत्रहीन लोगों के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद जगी है।
रक्षाबंधन के दिन परिवार शोक में डूबा हुआ था। इसी बीच नीलेश ताम्रकर की धर्मपत्नी श्रीमती मोहनी ताम्रकर, पुत्र चंदन और सौरभ तथा बहन शिल्पी ने नेत्रदान का फैसला लिया। परिजनों ने तत्काल हनुमान टोरिया सेवा समिति के हरि अग्रवाल एवं गिरजा पाटकर से संपर्क किया। समिति द्वारा सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट से संपर्क किए जाने के बाद चिकित्सकीय टीम छतरपुर पहुंची।
डॉ. विशाल रजक एवं उनके सहयोगी राजेंद्र सिंह ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत नीलेश ताम्रकर का नेत्रदान संपन्न कराया। इसके बाद दान किए गए नेत्रों को सुरक्षित रूप से सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट भेज दिया गया।
एक घर में मातम, दो घरों में रोशनी की उम्मीद
जिस दिन एक परिवार अपने प्रिय सदस्य के निधन का गम मना रहा था, उसी दिन लिए गए इस निर्णय ने दो अन्य परिवारों के लिए उम्मीद की किरण जगा दी। नीलेश ताम्रकर की आंखें अब ऐसे जरूरतमंद लोगों को रोशनी देने में उपयोग होंगी, जो नेत्रहीनता के कारण दुनिया की खूबसूरती और अपनों के चेहरों को देखने से वंचित हैं।
परिजनों का यह फैसला बताता है कि मृत्यु के बाद भी इंसान अपने अंगों के माध्यम से किसी दूसरे के जीवन में बदलाव ला सकता है। नेत्रदान को मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर नीलेश ताम्रकर के पुत्र चंदन एवं सौरभ ताम्रकर, मित्र अंशुल असाटी तथा हनुमान टोरिया सेवा समिति के हरि अग्रवाल एवं गिरजा पाटकर उपस्थित रहे।




