भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में सामने आई गंभीर त्रुटियों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पूरे मामले की आपराधिक जांच कराने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह जांच उन सभी परिस्थितियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने के लिए कराई जाएगी, जिनकी लापरवाही या भूमिका के कारण छात्रों तक गलतियों वाली पुस्तकें पहुंचीं।मुख्यमंत्री ने स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) के निदेशक को निर्देश दिया है कि वे मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के समक्ष प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराएं। इसके बाद क्राइम ब्रांच पूरे मामले की आपराधिक जांच शुरू करेगी।

राज्य सरकार के अनुसार, स्कूली शिक्षा से जुड़े इस मामले को अत्यंत गंभीर माना गया है, क्योंकि पाठ्यपुस्तकों में हुई त्रुटियों का सीधा असर लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मामले की प्रारंभिक जांच के लिए विकास आयुक्त (डेवलपमेंट कमिश्नर) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति को यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी कि पाठ्यपुस्तकों की तैयारी, संपादन, प्रूफरीडिंग और प्रकाशन की प्रक्रिया में कहां-कहां लापरवाही हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार ने तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए एससीईआरटी के पूर्व निदेशक और तीन सहायक निदेशकों (असिस्टेंट डायरेक्टर) को निलंबित कर दिया। इसके अलावा, छह अन्य सहायक निदेशकों के खिलाफ भी कथित भूमिका के आधार पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के आदेश जारी किए गए हैं।

अब सरकार ने मामले को केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए आपराधिक जांच कराने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान दस्तावेजों, निर्णय प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का विस्तार से परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी स्तर पर जानबूझकर लापरवाही, कर्तव्य में गंभीर लापरवाही या अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ओडिशा सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।