झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय सामने आया है। अदालत ने करीब 4 साल पुराने एक चर्चित हत्या के मामले में आरोपी राजेंद्र को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश आदित्य चतुर्वेदी की अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पुलिस और अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ जुर्म साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा। कोर्ट ने आरोपी की तत्काल रिहाई के आदेश जारी किए हैं।
नदी किनारे चारपाई पर मिला था शव; बेटे ने जताई थी हत्या की आशंका
मामला लहचूरा थाना क्षेत्र का है। 27 अप्रैल 2022 को बरुआमाफ गांव के पास धसान नदी किनारे 52 वर्षीय भैयालाल का शव उनकी झोपड़ी में चारपाई पर मिला था। मृतक नदी किनारे रहकर मछली पकड़ने का काम करता था। मृतक के बेटे लालाराम ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि घटना की रात उसके पिता ने पूर्व प्रधान उदय चंद्र और उसके बुआ के बेटे राजेंद्र के साथ मछली बनाकर शराब पी थी। इसी आधार पर उसने तीनों पर हत्या की आशंका जताई थी। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए राजेंद्र को गिरफ्तार कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
यह भी पढिए: लाशों पर राजनीति करना उचित नहीं, राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर बोले विश्वास सारंग
अदालत में उजागर हुईं पुलिस विवेचना की 3 बड़ी खामियां
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस जांच (विवेचना) में कई गंभीर कमियों और लापरवाही को रेखांकित किया, जो बरी किए जाने का मुख्य आधार बनीं: कोर्ट ने पाया कि राजेंद्र की गिरफ्तारी के समय पुलिस टीम के साथ वादी लालाराम और राजबहादुर मौजूद थे। हालांकि, बाद में विवेचक (Investigating Officer) ने राजबहादुर को चार्जशीट में गवाह ही नहीं बनाया। इस स्थिति को अदालत ने बेहद संदिग्ध माना।
पुलिस का दावा था कि घटना की रात शराब और मछली पार्टी हुई थी, लेकिन वारदात स्थल से शराब की बोतलें, पाउच या भोजन पकाने-खाने के कोई बर्तन/सामान बरामद नहीं हुए। इसके अलावा, मृतक के मोबाइल कॉल डिटेल (CDR) में भी आरोपी राजेंद्र का नंबर नहीं मिला और न ही गिरफ्तारी के वक्त राजेंद्र का मेडिकल या अल्कोहल टेस्ट कराया गया। पुलिस द्वारा आरोपी से बरामद डंडे, जींस और खून से सनी मिट्टी की फॉरेंसिक (FSL) जांच रिपोर्ट में मानव रक्त (Human Blood) होने की पुष्टि तो हुई, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि वह खून मृतक भैयालाल का ही था। विवेचक ने आरोपी के खून का नमूना लेकर बरामदगी वाले खून से डीएनए या ब्लड ग्रुप मैच कराने की कानूनी प्रक्रिया ही नहीं अपनाई।
यह भी पढिए: फुटपाथ से हटेगा अतिक्रमण, कफ सिरप और एक्सपायरी दवाओं की जांच के लिए ड्रग इंस्पेक्टर को अल्टीमेटम
अदालत का फैसला और तत्काल रिहाई के आदेश
अदालत ने कहा कि केवल आशंका या कमजोर साक्ष्यों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस की ढीली जांच और सबूतों के अभाव का सीधा फायदा आरोपी को मिला। अपर सत्र न्यायाधीश आदित्य चतुर्वेदी ने आरोपी राजेंद्र को हत्या के आरोपों से बरी करते हुए जेल से तुरंत रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।












