मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम, वर्ली में आयोजित दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला 'नए क्षितिज' का शुभारंभ शनिवार को भव्य रूप से हुआ। आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने पहले दिन आमंत्रित श्रोताओं को संबोधित करते हुए संगठन की विचारधारा, समाज एकीकरण और भारत के भविष्य पर गहन विचार व्यक्त किए। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान सहित फिल्म जगत, उद्योगपतियों, कलाकारों और सामाजिक हस्तियों ने शिरकत की।
डॉ. भागवत ने व्याख्यान में समाज को एकजुट करने पर जोर देते हुए कहा, "फिर से गुलामी नहीं आएगी, इसकी गारंटी हमारी एकता से ही है।" उन्होंने आरएसएस के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि संघ का काम संपूर्ण समाज को संगठित करना है, न कि अलग संगठन खड़ा करना।
उन्होंने यह भी कहा कि बहुत लोग कहते हैं कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, आरएसएस के हैं। वे प्रधानमंत्री हैं, उनकी एक राजनीतिक पार्टी है भाजपा, वो अलग है। उसमें बहुत से स्वयंसेवक हैं, प्रभावी भी है, लेकिन संघ की नहीं है।
उन्होंने कहा कि समाज को संगठित करने वाला काम बहुत समय खाने वाला है और इस काम को करने वाले के पास दूसरे किसी काम की फुर्सत नहीं रहती है। हमारे कार्यकर्ताओं के घर में जाकर पता करेंगे तो माताएं-बहनें कहेंगी कि इनको घर के काम के लिए फुर्सत नहीं है। संघ ने पहले से ही तय कर लिया है कि पूरे समाज को संगठित करने के अलावा संघ को कोई दूसरा काम नहीं करना है और इसके पूरा होने के बाद और कोई काम संघ नहीं करेगा।
भागवत ने हिंदू समाज की परिभाषा पर प्रकाश डालते हुए कहा, "भारत में हिंदू ही हैं, हिंदू एक विशिष्ट समुदाय या धर्म नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है। देश में चार प्रकार के हिंदू हैं- जो गर्व से कहते हैं 'हम हिंदू हैं', जो स्वीकार करते हैं, जो धीरे से बोलते हैं और जो भूल गए हैं।"
कार्यक्रम में सलमान खान की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा। डॉ. मोहन भागवत ने सलमान का उदाहरण देते हुए कहा, "सिनेमा में सलमान खान जो पहनते हैं, कॉलेज के विद्यार्थी वही पहनते हैं। पूछो क्यों, तो कहते हैं मालूम नहीं। समाज फैशन से चलता है, फैशन बनाने वाले ही श्रेष्ठ और विश्वासपात्र होते हैं।"
भागवत ने आगे कहा, "संघ उद्धार करने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं उद्धार करने का संदेश देने के लिए है। धर्मनिरपेक्षता गलत शब्द है, पंथनिरपेक्षता सही है। भारत का सनातन स्वभाव नहीं बदलता।" उन्होंने गुरु नानक देव का उल्लेख करते हुए हिंदू शब्द की उत्पत्ति पर भी चर्चा की।
‘नए क्षितिज' व्याख्यान में फिल्म निर्देशक सुभाष घई, अभिनेत्री व सांसद हेमा मालिनी, गायिका अनुराधा पौडवाल, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, एनएसई चेयरमैन आशीष चौहान, कोटक महिंद्रा सिक्योरिटीज के नीलेश शाह, 'केरल स्टोरी 2' के निर्माता विपुल शाह, टी-सीरीज के रमेश तौरानी, मराठी अभिनेता प्रसाद ओक, भाऊ कदम, सुनील बर्वे, पारसी समुदाय के धर्मगुरु दस्तूर खुर्शीद दस्तूर समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। सभी ने डॉ. भागवत के भाषण की सराहना की और कहा कि आरएसएस राष्ट्रहित में कार्यरत संगठन है, जो समाज को जोड़ने का काम कर रहा है।
नरेंद्र मोदी आरएसएस से नहीं, भाजपा से प्रधानमंत्री, वह संघ के स्वयंसेवक जरूर हैं : मोहन भागवत
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Saurabh Shukla
11 अक्टूबर 2026, 01:49 am IST
Saurabh Shukla11 अक्टूबर 2026, 01:49 am IST
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