भोपाल। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए दशकों से चली आ रही पूरक परीक्षा यानी सप्लीमेंट्री एग्जाम व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब इसके स्थान पर “द्वितीय परीक्षा” आयोजित की जाएगी। इस फैसले को प्रदेश के लाखों छात्रों के हित में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे छात्रों को अपने परिणाम सुधारने का बेहतर अवसर मिलेगा।


एमपी बोर्ड द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के तहत अब केवल फेल होने वाले छात्र ही नहीं, बल्कि वे छात्र भी द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकेंगे, जो अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं और अपने प्रतिशत में सुधार करना चाहते हैं। इस बदलाव से छात्रों को एक अतिरिक्त अवसर मिलेगा, जिससे वे अपने भविष्य को बेहतर बना सकें।


नई प्रणाली की सबसे खास बात यह है कि छात्र किसी भी विषय की परीक्षा दोबारा दे सकेंगे। इससे उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी जो कम नंबर आने के कारण अपने मनचाहे कॉलेज या कोर्स में प्रवेश नहीं ले पाते थे। द्वितीय परीक्षा का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। 12वीं कक्षा की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई तक आयोजित की जाएगी, जबकि 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई के बीच होगी।


इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए छात्रों को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के केवल 7 दिन के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल रखी गई है, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों सुनिश्चित हो सकें। छात्र अपने नजदीकी एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से निर्धारित परीक्षा शुल्क जमा कर आसानी से आवेदन कर सकेंगे।


शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव छात्रों के मानसिक दबाव को कम करेगा और उन्हें बेहतर प्रदर्शन का दूसरा मौका देगा। वहीं, अभिभावकों और छात्रों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।


कुल मिलाकर, एमपी बोर्ड की यह नई पहल शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र-हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।