नई दिल्ली। देशभर में मानसूनी बारिश का कहर देखने को मिल रहा है। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन (Landslide) और उफनती नदियों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, तो वहीं मैदानी इलाकों में भी जलभराव और जर्जर इमारतों के गिरने से हादसे हो रहे हैं।
देश के विभिन्न राज्यों से प्रमुख अपडेट्स
- उत्तराखंड: उत्तरकाशी में भूस्खलन के कारण यमुनोत्री नेशनल हाईवे कई स्थानों पर बाधित हो गया है। रुद्रप्रयाग, देहरादून, चमोली, नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में मौसम विभाग ने भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
- छत्तीसगढ़: लगातार बारिश के बीच बिलासपुर-रतनपुर-पेंड्रा मार्ग पर एक पुल दो हिस्सों में टूट गया, जिससे उस वक्त गुजर रही एक यात्री बस बीच में ही फंस गई।
- उत्तर प्रदेश: गंगा, घाघरा और शारदा समेत 10 प्रमुख नदियां उफान पर हैं। बिजनौर के 6 गांवों में गंगा का पानी घुसने से नाव चलाने की नौबत आ गई है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट है, जिसमें गोरखपुर और सीतापुर सहित 18 जिलों में भारी बारिश की आशंका है।
- राजस्थान: जोधपुर के नागोरी सिलावटों इलाके में बारिश के कारण मकान की छत गिरने से 8 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। हालांकि, आज से अगले एक सप्ताह तक राज्य में मानसून के कुछ कमजोर रहने की संभावना है।
- बिहार: राजधानी पटना सहित 25 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
- हरियाणा: 3 और 4 अगस्त को राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
- मध्य प्रदेश: प्रदेश में अब तक कुल कोटे की आधी बारिश भी दर्ज नहीं की गई है। अगले 2 दिनों तक भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।
- पश्चिम बंगाल (कोलकाता): कोलकाता में 6 अगस्त तक हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है।
क्या होता है 'बादल फटना' (Cloudburst)?
अक्सर मानसून के दौरान 'बादल फटने' की घटनाएं सुनने को मिलती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसका मतलब बादल के सचमुच फटने से नहीं है: यदि 20-30 वर्ग किलोमीटर के सीमित दायरे में 1 घंटे या उससे कम समय में 100 मिमी (10 सेमी) या उससे अधिक बारिश हो जाए, तो उसे 'बादल फटना' कहा जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बनती है। जब हवा में मौजूद अत्यधिक नमी को पहाड़ आगे बढ़ने से रोक देते हैं, तो नमी एक ही जगह तेजी से संघनित (Condence) होकर अचानक मूसलाधार बारिश के रूप में गिरती है।




