छतरपुर, रोहित पाठक। बागेश्वर धाम गढ़ा में शुक्रवार को पहली बार राष्ट्रीय शिष्य मंडल मिलन सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में देश-विदेश के 210 शिष्य मंडलों के प्रभारी एवं सह-प्रभारी एक मंच पर एकत्रित हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य शिष्य मंडलों के बीच संगठनात्मक समन्वय को मजबूत करना तथा सेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए आगामी कार्ययोजना तय करना रहा।


सम्मेलन के दौरान बागेश्वर सरकार ने सभी प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बैठक कर संगठन की आगामी गतिविधियों पर चर्चा की। उन्होंने आगामी जन्मोत्सव एवं गुरुपूर्णिमा महोत्सव में सभी शिष्य मंडल परिवारों को बागेश्वर धाम आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि शिष्य मंडलों का गठन सेवा, समर्पण और सनातन संस्कृति के संवर्धन के उद्देश्य से किया गया है।


बागेश्वर सरकार ने अपने संबोधन में कहा, “शिष्य मंडल का निर्माण सेवा के लिए हुआ है। आप सभी हमारे नहीं, बल्कि बागेश्वर बालाजी के सेवक हैं। सेवा ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है।” उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से समाजहित और धर्मरक्षा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।


सम्मेलन में नेपाल, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और झारखंड सहित विभिन्न राज्यों एवं देशों से आए प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। इस दौरान सभी प्रभारी एवं सह-प्रभारियों का परिचय कराया गया तथा उन्हें सेवा कार्यों के माध्यम से समाज और सनातन संस्कृति के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करने का संदेश दिया गया।


देशभर से आए शिष्य मंडल सदस्यों ने इस आयोजन को संगठनात्मक एकता, सेवा भावना और आध्यात्मिक समर्पण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल बताया। सम्मेलन का समापन बागेश्वर सरकार के आशीर्वचन एवं सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।