छतरपुर। छतरपुर जिले की बिजावर विधानसभा अंतर्गत सटई नगर परिषद में कानून और नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में शासकीय संपत्ति को ध्वस्त करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सटई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में महिला चिकित्सक के लिए तैयार हो रहे शासकीय आवास को रात के करीब 3 से 4 बजे के बीच जेसीबी चलाकर जमींदोज कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय विधायक राजेश शुक्ला (बबलू) भारतीय जनता पार्टी के मंडल पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का सघन निरीक्षण कर प्रशासन की संदेहास्पद कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया और अधिकारियों को दो-टूक चेतावनी दी कि तीन दिनों के भीतर दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो वे जनता और कार्यकर्ताओं के साथ सड़कों पर उतरने को विवश होंगे।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, सटई अस्पताल परिसर में चिकित्सकों के रहने के लिए दो सरकारी क्वार्टर स्थित हैं। इनमें से एक क्वार्टर में डॉक्टर सपरिवार निवास कर रहे हैं, जबकि दूसरे क्वार्टर में एक नवपदस्थ महिला चिकित्सक के रहने की व्यवस्था की जा रही थी। इसके लिए संबंधित भवन में बकायदा रंग-रोगन, मरम्मत और नई बिजली वायरिंग का काम चल रहा था। जैसे ही कुछ स्वार्थी तत्वों की नजर इस पर पड़ी, उन्होंने प्रशासनिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए देर रात 3 से 4 बजे के बीच चोरी-छिपे जेसीबी मशीन बुलाकर पूरे आवास को मलबे में तब्दील कर दिया। सुबह जब अस्पताल स्टाफ और स्थानीय नागरिकों ने ध्वस्त इमारत देखी, तो पूरे नगर में हड़कंप मच गया।


रविवार को घटनास्थल पर पहुंचे बिजावर विधायक राजेश शुक्ला 'बबलू' ने प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत पर कड़ा आक्रोश जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस भवन को डिसमेंटल करने का आदेश जनवरी 2025 में कलेक्टर द्वारा दिया गया था, लेकिन जब सभी विभागों से विधिवत एनओसी मांगी गई, तो लोक निर्माण विभाग समेत संबंधित विभागों ने साफ लिखकर दिया कि यह भवन गिराने योग्य नहीं है और इस कार्रवाई पर विधिवत रोक लगा दी गई थी। विधायक ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि जब दो साल से यह रोक प्रभावी थी और शासन के नियमानुसार जर्जर भवनों का निस्तारण केवल बारिश से पूर्व सुरक्षा कारणों से किया जाता है, तो फिर दो साल की बारिश बीत जाने के बाद आखिर रात के 3 बजे ऐसी कौन सी 'आपदा' आ गई कि पूरी इमारत को ही नेस्तनाबूद कर दिया गया? विधायक राजेश शुक्ला ने इस कृत्य को गंभीर आपराधिक साजिश करार देते हुए कहा कि आज शासकीय संपत्ति को इस कदर नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के हौसले इतने बुलंद हैं कि कल वे अपने निजी स्वार्थ के चलते सटई में 10 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन नए अस्पताल भवन को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शासकीय संपत्ति का ऐसा विनाश बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक ने मौके पर ही तहसीलदार, थाना प्रभारी (टीआई), ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को तलब किया और नियमों का उल्लंघन करने वाले तत्वों की पहचान कर बिना किसी दबाव के सीधी एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।


जिम्मेदारों का पल्ला झाड़ना संदिग्ध, बैकफुट पर स्थानीय प्रशासन

इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद की भूमिका पर गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं। किसी भी शासकीय संपत्ति के निस्तारण के लिए लोक निर्माण विभाग की तकनीकी रिपोर्ट, मूल्यांकन और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति अनिवार्य होती है। इसके बावजूद न तो बीएमओ को इसकी भनक लगी और न ही नगर परिषद सीएमओ रामस्वरूप अवस्थी ने कोई वैध दस्तावेज दिखाया। सीएमओ का यह कहना कि 'उन्हें जानकारी ही नहीं है कि भवन किसने तोड़ा', उनकी कार्यशैली और संदेहास्पद चुप्पी को उजागर करता है। वहीं स्थानीय स्तर पर नगर परिषद अध्यक्ष के पति के कथित मौखिक निर्देशों पर इस अवैध कृत्य को अंजाम दिए जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह कठघरे में आ गया है।


तीन दिन का अल्टीमेटम, वरना सड़कों पर होगा फैसला

विधायक राजेश शुक्ला ने प्रशासन को साफ चेतावनी देते हुए कहा, "हमने अधिकारियों को निर्देशित कर दिया है कि इसमें पूरी गंभीरता से जांच कर दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। यदि ऐसी घटनाओं पर पर्दा डाला गया, तो अपराध की पुनरावृत्ति होगी जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी। प्रशासन के पास तीन दिन का समय है; यदि नियमसंगत ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो हमें जनहित में सड़कों पर उतरना पड़ेगा। अधिकारी ऐसी नौबत न आने दें और निष्पक्ष कार्रवाई करें।" विधायक के इस सख्त रुख के बाद अवैध रूप से भवन गिराने वाले सिंडिकेट और लापरवाह अधिकारियों में हड़कंप का माहौल है।