भोपाल, जीतेन्द्र यादव। OBC विदेश अध्ययन योजना को लेकर JAY मूवमेंट और OBC महासभा का विरोध तेज होता जा रहा है। योजना की नई वैकेंसी सितंबर में जारी होने संबंधी OBC विभाग के आयुक्त के बयान पर JAY मूवमेंट के संस्थापक लखपत गुर्जर ने आपत्ति जताई है। उन्होंने दावा किया कि योजना की वैकेंसी हर वर्ष जून में आती है और सितंबर में वैकेंसी जारी होने की बात तथ्यों के विपरीत है।
लखपत गुर्जर ने कहा कि आंदोलन की प्रमुख मांग पहले से लंबित 114 रिक्त सीटों को पात्र विद्यार्थियों, विशेषकर प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों से नियमानुसार भरने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सीटों का समाधान होने तक नई वैकेंसी की प्रक्रिया को स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
2023 से 2026 तक 114 सीटें रिक्त होने का दावा
JAY मूवमेंट के अनुसार, उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर वर्ष 2023 की 50, वर्ष 2025-26 की 14 और वर्ष 2026-27 की 50 सीटें मिलाकर कुल 114 सीटें रिक्त हैं। संगठन ने इन सीटों का विभागीय स्तर पर सत्यापन कर पात्र विद्यार्थियों को अवसर देने की मांग की है।
गुर्जर का कहना है कि नई वैकेंसी निकालने से पहले पुरानी प्रतीक्षा सूची और रिक्त सीटों का निपटारा सरकार और विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका सवाल है कि जब पात्र विद्यार्थी पहले से अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं तो नई वैकेंसी जारी करने से पहले लंबित सीटों को क्यों नहीं भरा जा रहा।
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर उठाए सवाल
लखपत गुर्जर ने योजना की चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के चलते गरीब और सामान्य परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए निष्पक्ष चयन मुश्किल होता जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि योजना से जुड़े दस्तावेजों और पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
JAY मूवमेंट ने योजना से जुड़े निर्णयों और कार्यप्रणाली को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है। गुर्जर ने कहा कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते और आवश्यक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के इस्तीफे की मांग को भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बताया।
OBC महासभा ने भी किया नई वैकेंसी का विरोध
मामले में OBC महासभा की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। महासभा के युवा प्रदेश अध्यक्ष राधे जाट ने कहा कि पुरानी प्रतीक्षा सूची और लंबित रिक्त सीटों की स्थिति स्पष्ट किए बिना नई वैकेंसी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से चयन और आर्थिक सहायता की प्रतीक्षा कर रहे विद्यार्थियों के साथ पहले न्याय होना चाहिए। राधे जाट ने भी जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
7 कार्य दिवस की समयसीमा समाप्त होने का दावा
लखपत गुर्जर के मुताबिक, कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री, मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, अपर सचिव और OBC विभाग के आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर विद्यार्थियों की मांगों पर 7 कार्य दिवस के भीतर संतोषजनक जवाब मांगा गया था।
ज्ञापन में चयन प्रक्रिया की स्पष्ट समयसीमा तय करने, आवेदन आमंत्रित होने के बाद चयन प्रक्रिया के बीच नियमों में बदलाव नहीं करने, 114 रिक्त सीटें भरने, पात्र प्रतीक्षा सूची के विद्यार्थियों को अवसर देने, आर्थिक सहायता की समीक्षा करने और विद्यार्थियों को समय पर फंडिंग उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल थीं।
गुर्जर का कहना है कि निर्धारित समयसीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन विद्यार्थियों को अब तक ऐसा संतोषजनक जवाब नहीं मिला है जिससे उनकी समस्याओं का समाधान होता दिखाई दे।
2025 में तीन बार नियम बदलने का आरोप
JAY मूवमेंट ने वर्ष 2025 की चयन प्रक्रिया के दौरान विभागीय स्तर पर तीन बार नियमों में बदलाव किए जाने का आरोप लगाया है। संगठन ने इन कथित बदलावों की निष्पक्ष जांच कराने और यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव किस स्तर पर और किस आधार पर किए गए।
छात्रवृत्ति राशि को लेकर भी सवाल
विदेश अध्ययन योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर भी JAY मूवमेंट ने सवाल उठाए हैं। लखपत गुर्जर ने कहा कि वर्ष 2008 में विद्यार्थियों को लगभग 5,000 पाउंड और 7,700 डॉलर तक की सहायता दी जाती थी, जबकि वर्ष 2026 में विदेशों में शिक्षा, रहने, भोजन और परिवहन की लागत काफी बढ़ चुकी है।
उन्होंने मांग की कि योजना की आर्थिक सहायता राशि की वर्तमान महंगाई और विदेश में उच्च शिक्षा की वास्तविक लागत के आधार पर समीक्षा की जाए, ताकि जरूरतमंद विद्यार्थियों को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिल सके।
“अब लड़ाई आर-पार की होगी”
लखपत गुर्जर ने कहा कि JAY मूवमेंट ने अब तक सरकार और विभाग के साथ संवाद के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, मंत्री और OBC विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार लिखित रूप से विद्यार्थियों की समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि अब ज्ञापन की समयसीमा भी समाप्त हो चुकी है और आंदोलन का अगला चरण अधिक व्यापक होगा। यदि विद्यार्थियों की मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो JAY मूवमेंट जिला, प्रदेश और देश स्तर पर OBC विद्यार्थियों, युवाओं और सामाजिक संगठनों को जोड़कर लोकतांत्रिक आंदोलन करेगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन केवल विदेश अध्ययन योजना तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें OBC के 27 प्रतिशत आरक्षण, शिक्षा व्यवस्था, OBC से जुड़े अधिकार, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही जैसे मुद्दे भी शामिल किए जाएंगे।
गुर्जर ने सरकार से 114 रिक्त सीटों का समाधान करने, पुरानी वेटिंग लिस्ट क्लियर करने और चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग दोहराई। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर निर्णय नहीं होने की स्थिति में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “सरकार बाद में यह न कहे कि हमें बताया नहीं गया। हम पहले ही मुख्यमंत्री से लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक को लिखित में बता चुके हैं। अब ज्ञापन की समयसीमा भी समाप्त हो गई है। इसके बाद जो होगा, वह देश और दुनिया देखेगी।”




