नई दिल्ली। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, फिलिस्तीनी संगठन हमास और पाकिस्तान में सक्रिय कई आतंकी संगठनों के बीच करीबी संबंध लंबे समय से बने हुए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के समर्थन से हमास और स्थानीय आतंकी संगठनों के बीच कई बैठकें आयोजित की गई हैं।

5 फरवरी 2025 को रावलकोट में हमास, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक का शीर्षक था, "कश्मीर एकजुटता और हमास ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड"। बैठक का उद्देश्य विभिन्न विचारों और संगठनात्मक अनुभवों पर चर्चा करना था।

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी ने बताया कि इन बैठकों में ड्रोन के इस्तेमाल जैसे परिचालन संबंधी मुद्दों पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन मुख्य मकसद फिलिस्तीन और कश्मीर के मुद्दों को एक-दूसरे से जोड़ना था।

अधिकारी के अनुसार, इन संगठनों के नेताओं की कोशिश दोनों मुद्दों को 'प्रतिरोध आंदोलन' के रूप में पेश करने की थी। यह केवल अलग-अलग आतंकी संगठनों को एक मंच पर लाने का प्रयास नहीं था, बल्कि फिलिस्तीन और कश्मीर के मुद्दों को एक साझा संघर्ष के रूप में दिखाने की रणनीति भी थी।

अधिकारी ने कहा, "इसका बड़ा उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में एक संदेश पहुंचाना था। अब इन बैठकों की तस्वीरें और वीडियो कश्मीर से जुड़े समूहों में फैलाने की कोशिश की जा रही है, ताकि स्थानीय लोग इस मुद्दे से खुद को जोड़ सकें और इन संगठनों का समर्थन करें।"

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का प्रचार काफी कमजोर पड़ा है।

उन्होंने कहा कि अब बहुत कम लोग पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए उस नैरेटिव को स्वीकार कर रहे हैं, क्योंकि लोगों को महसूस हो रहा है कि पत्थर या हथियार उठाकर हिंसा करने से उन्हें कोई फायदा नहीं मिलने वाला है। ऐसे में हमास का पहलू आईएसआई के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।

अधिकारी ने कहा, "आईएसआई यह संदेश देना चाहती है कि कश्मीर केवल पाकिस्तान द्वारा उठाया जाने वाला मुद्दा नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन भी इसे एक प्रतिरोध आंदोलन के रूप में पेश कर रहे हैं।"

एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, आईएसआई को उम्मीद है कि हमास को इस अभियान से जोड़ने पर कश्मीर के कुछ लोग प्रभावित हो सकते हैं और उन्हें लग सकता है कि उनका मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया जा रहा है।

अधिकारी ने कहा, "संभावना है कि कुछ लोग इस प्रचार के जाल में फंस जाएं और हमास के नाम को जोड़कर चलाया जा रहा यह अभियान भर्ती बढ़ाने में मददगार साबित हो।"

अधिकारियों का मानना है कि हमास-जैश-लश्कर गठजोड़ कश्मीर में अपनी रणनीति और हमलों के तरीकों में बदलाव की कोशिश कर सकता है।

हालांकि, हमास की शैली के हमलों को अपनाने की योजना चर्चा का हिस्सा है, लेकिन इससे भी बड़ा उद्देश्य कश्मीरियों को फिर से इस संघर्ष में शामिल करने का प्रयास है।

अधिकारियों का कहना है कि जैश और लश्कर द्वारा अपनाए जा रहे परिचालन बदलावों की तुलना में यह वैचारिक अभियान कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है।

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। सबसे प्रमुख बदलाव आतंकवाद में कमी और पर्यटन में बढ़ोतरी के रूप में सामने आए हैं।

इसके अलावा, आतंकवादी संगठनों में नई भर्तियों की संख्या में काफी गिरावट आई है और कई ओवरग्राउंड वर्कर (ओडब्ल्यूजी) नेटवर्क भी समाप्त किए जा चुके हैं। इससे आईएसआई समर्थित तत्वों के लिए काम करना कठिन हो गया है।

अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान जिस विचारधारा और प्रचार के जरिए कश्मीरियों को प्रभावित करने की कोशिश करता था, उसका असर भी तेजी से कम हो रहा है, जिससे आईएसआई चिंतित है।

उनके अनुसार, अब आईएसआई एक नया आयाम जोड़ना चाहती है, जिससे कश्मीर के युवाओं को दोबारा उकसाया जा सके। उसे उम्मीद है कि हमास से जुड़ा प्रचार अभियान इस उद्देश्य को पूरा करने में मदद कर सकता है।