मुंबई। साउथ एक्टर अदिवि शेष ने असम सरकार से काजीरंगा के पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील इलाके में प्रस्तावित रिजॉर्ट निर्माण की योजना पर सावधानी से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों में विकास की योजना बनाते समय वन्यजीवों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों की चिंताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। एक्टर ने इस संबंध में पत्र लिखकर राज्य सरकार से प्रस्तावित निर्माण के असर की समीक्षा करने और जमीन से जुड़ी जानकारी में पारदर्शिता बरतने की मांग की है।
अदिवि शेष ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि प्रकृति किसी की निजी संपत्ति नहीं है बल्कि इंसान कुछ समय के लिए उसका संरक्षक है।
उन्होंने कहा, ''प्रकृति हमारी नहीं है। हम सिर्फ कुछ समय के लिए इसके संरक्षक हैं। जब हम काजीरंगा जैसी जगह की बात करते हैं, तो हम सिर्फ किसी नेशनल पार्क या टूरिस्ट डेस्टिनेशन की बात नहीं कर रहे होते। हम एक ऐसे जीवंत इकोसिस्टम की बात कर रहे हैं, जो पीढ़ियों से मौजूद है। यह अनोखे वन्यजीवों का घर है और हमारी ऐसी प्राकृतिक धरोहर है, जो हर भारतीय और कई मायनों में पूरी दुनिया की है।''
अदिवि ने काजीरंगा के इकोसिस्टम को बचाने की जरूरत पर जोर दिया। यह इलाका एक सींग वाला गैंडा के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा, ''एक सींग वाला गैंडा सिर्फ असम की पहचान नहीं है बल्कि यह हमारी शानदार जैव विविधता का प्रतीक है, जिसे बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। जब किसी जानवर का प्राकृतिक ठिकाना छिन जाता है, उसका आने-जाने का रास्ता बाधित हो जाता है या इकोसिस्टम में हमेशा के लिए बदलाव आ जाता है, तो पहले जैसा संतुलन वापस लाना बेहद मुश्किल हो सकता है। कई बार ऐसा करना नामुमकिन भी हो जाता है।''
अदिवि शेष ने कहा, ''हमें खुद से पूछना चाहिए कि क्या जमीन के हर हिस्से को व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए विकसित करना जरूरी है? क्या निर्माण से मिलने वाला तुरंत फायदा वन्यजीवों और पर्यावरण पर पड़ने वाले लंबे समय के नुकसान के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण है? सस्टेनेबल टूरिज्म का मतलब प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना उसका अनुभव लेना होना चाहिए, न कि उस प्राकृतिक नजारे और माहौल को ही बदल देना, जिसकी वजह से कोई जगह खास बनती है।''
एक्टर ने कहा कि उनकी चिंता सिर्फ गैंडों और काजीरंगा में रहने वाले दूसरे वन्यजीवों से जुड़ी नहीं है। इस इलाके में कई स्थानीय समुदाय भी रहते हैं, जिनकी जिंदगी, रोजी-रोटी और परंपराएं पीढ़ियों से इस जमीन और प्रकृति से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा, ''इन लोगों की आवाज, उनके अनुभव और उनकी चिंताओं को उन सभी फैसलों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, जिनका असर उनके आसपास के इलाके पर पड़ता है। अगर उन लोगों को ही चर्चा से बाहर रखा जाएगा, जो पीढ़ियों से प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहते आए हैं, तो संरक्षण की कोशिशें सफल नहीं हो सकतीं।''
अदिवि शेष ने अपने पत्र के जरिए असम सरकार से प्रस्तावित रिजॉर्ट निर्माण के संभावित असर की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने, जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी सामने रखने और जरूरत के मुताबिक स्वतंत्र पर्यावरणीय आकलन कराने की अपील की। उन्होंने कहा, ''कोई भी ऐसा फैसला लेने से पहले पर्यावरण, कानून और स्थानीय समुदायों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए, जिसे बाद में बदला न जा सके।''
उन्होंने कहा, ''काजीरंगा हमारी अनमोल प्राकृतिक धरोहर है। आने वाली पीढ़ियों के लिए यहां के वन्यजीवों, जंगलों और इस क्षेत्र को अपना घर मानने वाले लोगों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। आज हम जो फैसले लेंगे, वही तय करेंगे कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या छोड़कर जाएंगे।''











