सतना, अंबिका केशरी। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (एमपी ईएसबी) द्वारा आयोजित वन रक्षक, क्षेत्र रक्षक, जेल प्रहरी एवं सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा की द्वितीय पाली तकनीकी खामी के कारण रद्द होने से सतना में अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। परीक्षा के लिए शहर के आदित्य कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया था, जहां निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू नहीं हो सकी। करीब तीन घंटे तक परीक्षा कक्ष में इंतजार कराने के बाद अभ्यर्थियों को परीक्षा निरस्त होने की जानकारी दी गई।


परीक्षा रद्द होने की सूचना मिलते ही केंद्र के बाहर हंगामा शुरू हो गया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने अव्यवस्था के खिलाफ विरोध जताया। बाद में एनएसयूआई के प्रदेश सचिव के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने पैदल मार्च निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्य द्वार पर धरना दिया।


धरने की सूचना मिलते ही एसडीएम राहुल सिलाड़िया, एलआर जांगिड़, सीएसपी देवेंद्र सिंह चौहान, थाना प्रभारी रावेंद्र द्विवेदी तथा तहसीलदार सौरभ द्विवेदी सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रदर्शनकारी छात्रों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा में हुई अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और अभ्यर्थियों को हुई आर्थिक व मानसिक क्षति की भरपाई की मांग की।


धरने में शामिल कई छात्रों ने अपनी पीड़ा भी साझा की। डिंडोरी, मंडला, छिंदवाड़ा और बालाघाट सहित दूरदराज जिलों से आए अभ्यर्थियों ने बताया कि परीक्षा की तैयारी के साथ यात्रा और ठहरने में काफी खर्च हुआ। डिंडोरी निवासी छात्र सचिन भावुक हो गया, जबकि धर्मेंद्र दुबे ने बताया कि वह अपना काम छोड़कर परीक्षा देने आया था, लेकिन घंटों इंतजार के बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई।


इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्थाओं और तकनीकी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याएं युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। हालांकि कर्मचारी चयन मंडल ने रद्द की गई परीक्षा के लिए 20 जून को नई तिथि घोषित कर दी है, लेकिन छात्रों का कहना है कि इससे उनके समय, धन और मानसिक तनाव की भरपाई नहीं हो सकती।


अभ्यर्थियों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और भरोसेमंद बनाया जाए।