पन्ना/गुनौर, जीतेन्द्र रजक । तहसील प्रशासन की कथित लापरवाही के चलते अतिक्रमण हटाने पहुंची राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम को बिना कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा। मामला सुंगरहा क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां तहसील कार्यालय से जारी बेदखली आदेश में दर्ज आराजी नंबर और मौके की जमीन के आराजी नंबर में अंतर सामने आने के बाद कार्रवाई रोक दी गई। इस घटनाक्रम के बाद तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुनौर तहसील कार्यालय द्वारा पत्र क्रमांक 488, राजस्व प्रकरण क्रमांक 0011अ-68/26-27 में 3 अगस्त 2026 को आदेश जारी किया गया था। आदेश में आराजी क्रमांक 724/2 का उल्लेख करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित थी। बताया गया है कि उक्त आराजी सुषमा पटेल के नाम दर्ज है। आदेश के पालन में राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की टीम बुलडोजर तथा अन्य अमले के साथ मौके पर पहुंची थी।
मौके पर दस्तावेजों और जमीन के रिकॉर्ड का मिलान किए जाने पर आराजी नंबर को लेकर अंतर सामने आया। जानकारी के मुताबिक जिस स्थान पर कार्रवाई की जानी थी, वह आराजी क्रमांक 720 बताया गया, जहां धपूरा खान द्वारा झोपड़ी बनाकर रहने तथा सुषमा पटेल द्वारा एक कमरा, बोर और बिजली ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाने की बात कही गई है। यह भी दावा किया गया है कि पूर्व में पटवारी द्वारा दिए गए प्रतिवेदन में आराजी क्रमांक 720 पर दोनों का अतिक्रमण दर्शाया गया था, जबकि तहसील कार्यालय से जारी आदेश में आराजी क्रमांक 724 दर्ज हो गया।
आदेश में दर्ज आराजी नंबर और मौके की जमीन के नंबर में अंतर होने के कारण प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई। गलत आराजी नंबर के आधार पर अतिक्रमण हटाने की स्थिति में कानूनी विवाद उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए टीम बिना निर्माण हटाए वापस लौट गई।
मामले में यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि कार्रवाई एक पक्ष के खिलाफ किए जाने की तैयारी थी, जबकि संबंधित भूमि पर दूसरे पक्ष के अतिक्रमण की बात भी सामने आ रही है। हालांकि इन दावों और संबंधित जमीन के वास्तविक राजस्व रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
घटना के बाद तहसीलदार संतोष अरिहा और तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि बेदखली जैसे महत्वपूर्ण आदेश को जारी करने से पहले आराजी नंबर सहित राजस्व अभिलेखों का पूरी तरह सत्यापन किया जाना चाहिए था। बुलडोजर, पुलिस और राजस्व अमले के मौके तक पहुंचने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से सरकारी समय और संसाधनों के उपयोग पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
अब देखना होगा कि वरिष्ठ अधिकारी मामले की जांच कर आदेश में आराजी नंबर की कथित त्रुटि के लिए जिम्मेदारी तय करते हैं या नहीं। साथ ही संशोधित आदेश जारी कर संबंधित जमीन पर अतिक्रमण को लेकर आगे क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर भी स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।




