भोपाल। मध्य प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में अब तक केवल 16.3 इंच (413.3 मिमी) बारिश हुई है, जो इस अवधि की औसत बारिश (20 इंच) से करीब 18% कम है। प्रदेश में औसत बारिश का कोटा 37.3 इंच है, जिसकी तुलना में अभी आधी बारिश भी नहीं हुई है। लगातार मानसून ब्रेक होने के चलते भोपाल, इंदौर, जबलपुर और उज्जैन समेत प्रदेश के 49 जिलों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं, जबकि केवल 6 जिलों में ही बारिश की स्थिति बेहतर है।
संभागों और प्रमुख शहरों का हाल
भोपाल, जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा और नर्मदापुरम संभाग के सभी जिलों में बारिश का आंकड़ा माइनस में है। वहीं इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के केवल 6 जिलों में ही औसत से अधिक पानी गिरा है।
5 बड़े शहरों का आंकड़ा:
ग्वालियर: औसत से 7% अधिक बारिश, भोपाल: औसत से 7% कम बारिश, इंदौर: औसत से 2% कम बारिश, उज्जैन: औसत से 14% कम बारिश, जबलपुर: औसत से 29% कम बारिश
बीते 24 घंटों में 20 से ज्यादा जिलों में हुई बारिश
पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के 20 से अधिक जिलों में बारिश दर्ज की गई। सीधी में सबसे ज्यादा 3 इंच पानी गिरा। इसके अलावा ग्वालियर में 2.3 इंच, दतिया में 2 इंच, रीवा में 1.8 इंच, सतना में 1.2 इंच और शिवपुरी में 1 इंच बारिश हुई। मैहर, पन्ना, श्योपुर, बालाघाट, टीकमगढ़, छतरपुर, नर्मदापुरम, भोपाल और इंदौर में भी हल्की से मध्यम बौछारें पड़ीं।
आगामी 3 दिनों का अलर्ट: एक्टिव हुआ वेस्टर्न डिस्टरबेंस
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, वर्तमान में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव हुआ है। यदि यह सिस्टम मजबूत रहता है, तो प्रदेश में बारिश के आंकड़े में सुधार हो सकता है। गुरुवार को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और दमोह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, सागर और चंबल संभाग के शेष जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।




