ग्वालियर। सरकारी जमीनों को भू-माफियाओं के हवाले करने के खेल में शामिल लापरवाह और भ्रष्ट अधिकारियों के लिए अब बुरे दिन शुरू होने वाले हैं। अदालतों में कमजोर पैरवी, जानबूझकर की गई देरी और रिकॉर्ड छिपाने जैसी कारगुजारियों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी के बाद राज्य सरकार ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक गाइडलाइन जारी की है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने हाईकोर्ट में नई नीति पेश करते हुए साफ कर दिया है कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या भू-माफियाओं से मिलीभगत के कारण शासन केस हारता है, तो उस जमीन की कीमत या वित्तीय नुकसान की पूरी भरपाई संबंधित अधिकारी की जेब से की जाएगी।


हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: 'निजी पक्षों को लाभ पहुँचाने के लिए बलि चढ़ा रहे शासन के हित'

ग्वालियर जिले में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जहाँ शहर की बेशकीमती सरकारी जमीनें सिर्फ इसलिए निजी हाथों में चली गईं क्योंकि सरकारी वकीलों और राजस्व अधिकारियों ने समय पर पुख्ता रिकॉर्ड पेश नहीं किए या जानबूझकर अपील दायर करने में महीनों की देरी की। इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी कि अधिकारी निजी स्वार्थ के चलते शासन के हितों की बलि चढ़ा रहे हैं। कोर्ट ने मुख्य सचिव और राजस्व विभाग से जवाब मांगते हुए पूछा था कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।


अब कागजों पर नहीं, सीधे वेतन और संपत्ति से होगी वसूली

हाईकोर्ट के भारी दबाव और फटकार के बाद सरकार ने जो नई व्यवस्था लागू की है, उसमें जवाबदेही अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि किसी प्रकरण में यह सिद्ध होता है कि अधिकारी की ढिलाई या जानबूझकर की गई देरी के कारण शासन के खिलाफ फैसला आया है, तो उस संपत्ति के बाजार मूल्य या आर्थिक नुकसान का आकलन किया जाएगा। यह राशि संबंधित शासकीय सेवक के वेतन या उसकी संपत्ति से वसूल की जाएगी। इसके साथ ही दोषी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर उसे सेवा से पृथक करने जैसी सख्त कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।


जवाबदेही तय करने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम होगा मजबूत

सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब हर संभाग और जिला स्तर पर एक विशेष टीम अदालती मामलों की निगरानी करेगी। विशेष रूप से उन मामलों पर नजर रखी जाएगी जहाँ करोड़ों की सरकारी जमीन दांव पर लगी है। सरकारी वकीलों को भी समय पर जवाब दावा पेश करने और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों के साथ समन्वय करना होगा। ग्वालियर संभाग में इस नई नीति का सबसे ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि यहाँ भू-माफियाओं और प्रशासनिक तंत्र के गठजोड़ के कई पुराने मामले जांच के दायरे में हैं। सरकार के इस कदम से उन अधिकारियों में हड़कंप मच गया है जो अब तक 'अपील में देरी' को हथियार बनाकर शासन को नुकसान पहुँचाते आ रहे थे।