वेलिंगटन। भारतीय तेज गेंदबाज गुरनूर बरार शनिवार को न्यूजीलैंड की तेज गेंदबाजी के अनुकूल परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाने से बेहद खुश हैं। हेनरी स्टेडियम में खेले गए वनडे सीरीज के दूसरे मैच में उन्होंने चार विकेट लेकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।
गुरनूर ने 30 रन देकर 4 विकेट लिए, जिसके लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। भारत ने बारिश से प्रभावित यह मुकाबला 'डकवर्थ लुईस नियम' के आधार पर 4 रन से जीता। इससे पहले, गुरनूर बरार सीरीज के शुरुआती मुकाबले में 44 रन देकर 3 विकेट अपने नाम कर चुके थे।
गुरनूर बरार न्यूजीलैंड की उछाल भरी पिचों पर गेंदबाजी का भरपूर आनंद ले रहे हैं। दूसरे वनडे मुकाबले में जीत के बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन और गेंदबाजी की रणनीतियों पर बात करते हुए प्रेजेंटेशन सेरेमनी में कहा, "मुझे सच में मजा आया। न्यूजीलैंड में गेंदबाजी करते समय, यहां की उछाल और गति ने मेरी बहुत मदद की, इसलिए मुझे मजा आया।"
भारत में पिचें अक्सर सपाट होती हैं, लेकिन 6 फुट 5 इंच लंबे इस तेज गेंदबाज की खासियत यह है कि वह लगातार 140 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से 'हार्ड लेंथ' पर गेंदबाजी करते हैं। न्यूजीलैंड जैसी विदेशी परिस्थितियों में उन्हें इसका खूब फायदा मिला है।
उन्होंने कहा, "जाहिर है, भारत में पिचें काफी सपाट होती हैं, इसलिए हमें वहां 'हार्ड लेंथ' पर गेंदबाजी करनी पड़ती है। लेकिन यहां, अतिरिक्त उछाल मिलती है। इसलिए मैं बस अपनी ताकत के हिसाब से गेंदबाजी कर रहा था, और यह काम कर गया। अगर आप एक तेज गेंदबाज हैं और औसतन 140 या 142 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे हैं, तो आपको आक्रामक भी होना पड़ता है, लेकिन आपको अपनी सीमाओं का भी पता होना चाहिए। मैं बस इसका आनंद लेता हूं और लगातार गेंदबाजी करता रहता हूं।"
इस दूसरे मैच में, उन्होंने अपने सभी विकेट 'बैक-ऑफ-लेंथ' गेंदों या बाउंसरों की मदद से हासिल किए। गुरनूर ने बताया, "मैं बस उसी 'हार्ड लेंथ' पर गेंदबाजी करने की कोशिश करता हूं, जहां बल्लेबाज पुल शॉट खेलने की कोशिश करते हैं। मैं गेंद को बहुत ज्यादा ऊपर नहीं रखना चाहता। मैं बस कंधे के स्तर पर गेंदबाजी करता रहता हूं।
बारिश से प्रभावित मुकाबले को 47-47 ओवरों का कर दिया गया था, लेकिन पहले बल्लेबाजी करने उतरी कीवी टीम महज 41 ओवरों में 134 के स्कोर तक पर सिमट गई। इसके जवाब में भारत ने 26 ओवरों में 7 विकेट खोकर 113 रन बना लिए थे, लेकिन बारिश के चलते आगे का खेल नहीं हो सका। अंतत: डकवर्थ लुईस नियम के आधार पर टीम इंडिया को मुकाबले का विजेता घोषित किया गया।
















