ऑकलैंड। न्यूजीलैंड के खिलाफ ईडन पार्क में खेले गए पहले वनडे में तीन विकेट लेने वाले भारतीय तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने अपनी सफलता का श्रेय मैच के दौरान रणनीति में किए गए बदलाव को दिया। उन्होंने कहा कि कप्तान शुभमन गिल और साथी तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह तथा अंशुल कंबोज से मिली सलाह उनके लिए काफी उपयोगी साबित हुई, जिससे उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिली।बुधवार को ईडन पार्क में खेले गए मैच में बरार ने 44 रन देकर 3 विकेट लिए। भारतीय तेज गेंदबाजों ने न्यूजीलैंड की पूरी टीम को 40.2 ओवर में 185 रन पर समेटा, जिससे भारत को डकवर्थ लुईस नियम के तहत 5 विकेट से जीत मिली। गुरुवार को बीसीसीआई के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में बरार ने कहा, "यहां गेंदबाजी के लिए माहौल बहुत अच्छा है। विकेट भी काफी अच्छे हैं। हमने यहां पहले चार-पांच दिन अभ्यास किया था, इसलिए विकेट वैसा ही था। मैंने बस अपनी लेंथ और अपने गेंदबाजी स्टाइल पर भरोसा रखा, और उसी का यह नतीजा है।"
इस लंबे कद के तेज गेंदबाज को अपने पहले ही ओवर में एक छक्का पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदलने का फैसला किया। उन्होंने बताया, "गेम प्लान यह था कि यहां सीधी बाउंड्री थोड़ी छोटी है। मेरे पहले ओवर में जो छक्का लगा, वह थोड़ी आगे फेंकी गई गेंद पर था। इसी कारण मैंने सोचा कि अपनी लेंथ को थोड़ा पीछे कर लूं, ताकि स्क्वायर लेग या फाइन लेग के ऊपर से शॉट मारना मुश्किल हो जाए। मैंने इस बारे में अर्शदीप और अंशुल से बात की, जो पहले भी इस विकेट पर गेंदबाजी कर चुके थे। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर मैं 'हार्ड लेंथ' (थोड़ी पीछे की लेंथ) पर गेंदबाजी करूं, तो मेरी लंबाई की वजह से मुझे बेहतर उछाल (बाउंस) मिलेगा।"
पूरे मैच के दौरान भारतीय तेज गेंदबाजों को 'गुड लेंथ' से थोड़ी पीछे की गेंदों पर अच्छा मूवमेंट और उछाल मिला। अर्शदीप सिंह ने 70 रन देकर 4 विकेट लिए, जबकि 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुने गए अंशुल कंबोज ने अपने 10 ओवरों में केवल 22 रन दिए और 2 विकेट चटकाए। बरार ने कहा कि तेज गेंदबाजों की इस चौकड़ी के सामूहिक प्रयास ने इस दिन को खास बना दिया।
उन्होंने कहा, “हम चारों को एक साथ मौका मिला है। जाहिर है कि अर्शदीप ने काफी मैच खेले हैं। वह टी20 में भारत के सबसे अनुभवी गेंदबाज हैं। इसी कारण मेरा प्लान यह था कि अगर मुझे गेंदबाजी करने का मौका मिला है, तो मुझे खुद पर भरोसा रखना होगा और अपनी टीम के लिए जीत हासिल करनी होगी। इस सामूहिक प्रयास ने खेल को और भी मजेदार बना दिया।"
बरार ने आगे कहा, "भले ही आकिब (नबी) को कोई विकेट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने शानदार गेंदबाजी की, और अंशुल ने भी बेहतरीन गेंदबाजी की। मैंने भी शानदार स्पेल डाला और मुझे विकेट भी मिले। जब चारों तेज गेंदबाज एक खास मकसद के साथ खेलते हैं और उसमें सफल होते हैं, तो बहुत अच्छा लगता है। उम्मीद है कि हम आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे।”
पिछले महीने न्यू चंडीगढ़ में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने वनडे डेब्यू में बिना कोई विकेट लिए 82 रन देने वाले कंबोज ने बताया कि उन्होंने अपना पूरा ध्यान परिस्थितियों और सही लेंथ पर गेंदबाजी करने पर केंद्रित रखा था। अंशुल ने कहा, "असल में, मैं इस बारे में ज्यादा नहीं सोच रहा था। मैं बस मौजूदा स्थिति और उसकी जरूरतों पर ध्यान दे रहा था। मेरा फोकस सिर्फ अपने प्लान और सही लेंथ पर अमल करने पर था, बाकी चीजों के बारे में नहीं। आखिरकार, आपको यह देखना होता है कि पिच का बर्ताव कैसा है और किस लेंथ पर गेंदबाजी करना सही रहेगा। इसलिए, मेरा पूरा ध्यान उसी पर था।”
हरियाणा के इस तेज गेंदबाज ने आगे कहा कि 2025 में मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में अपने इंटरनेशनल डेब्यू के बाद से उनका नजरिया बदल गया है, जो उनके लिए बहुत अच्छा नहीं रहा था। उन्होंने कहा, "क्रिकेट को लेकर मेरा नजरिया और माइंडसेट बदल गया है। आजकल ज्यादा मैच खेले जा रहे हैं, इसलिए मैं अब एक आक्रामक माइंडसेट के साथ क्रिकेट खेल रहा हूं। अब मैं आक्रामक सोच के साथ बेहतर खेल रहा हूं। मेरी बॉडी लैंग्वेज भी पहले से बेहतर है। डेब्यू के बाद से ही मेरा यही माइंडसेट रहा है कि अपनी बॉडी लैंग्वेज और सोच को आक्रामक रखा जाए, ताकि मेरा पूरा रवैया सकारात्मक रहे।”
कंबोज ने आगे कहा कि एक खराब प्रदर्शन से उनके करियर या काबिलियत का फैसला नहीं हो सकता। भारतीय गेंदबाज ने कहा, “मैं इस बात पर ध्यान देना चाहता था कि मैं क्या अच्छा कर रहा हूं, न कि इस बात पर कि क्या गलत हुआ। किसी का भी करियर सिर्फ एक मैच से तय नहीं होता, 10-12 साल की कड़ी मेहनत का फैसला एक मैच से नहीं किया जा सकता। इसी कारण मैं अपना नजरिया बदलना चाहता था और आक्रामक मानसिकता बनाए रखना चाहता था।”















