अहमदाबाद। नवरात्रि 2026 के स्वागत के लिए अहमदाबाद में सांस्कृतिक रंग बिखरने लगे हैं। शहर के प्रसिद्ध आर्ट्स ग्रुप 'पनघट' ने इस साल की नवरात्रि के लिए एक शानदार कॉस्ट्यूम रिहर्सल का आयोजन किया। इस रिहर्सल में रंग-बिरंगे पारंपरिक पोशाकों से सजे कलाकारों ने गरबा और डांडिया का मनमोहक प्रदर्शन किया। इस दौरान न सिर्फ डांस स्टेप्स बल्कि कॉस्ट्यूम और स्टेज प्रेजेंटेशन का भी बारीकी से अभ्यास किया गया।

पनघट ग्रुप के को-डायरेक्टर और कोरियोग्राफर जयेश प्रजापति ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि नवरात्रि का पर्व अब केवल गुजरात तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा, "हमारा गरबा अब यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची तक पहुंच गया है, इसलिए पूरी दुनिया जानती है कि यह विश्व का सबसे लंबे समय तक चलने वाला नृत्य उत्सव है।"

जयेश प्रजापति ने रिहर्सल के बारे में जानकारी देते हुए कहा, "हमने इस स्पेशल रिहर्सल में एक ऐसा माहौल बनाया है, जो पूरी तरह से परंपरागत है। कॉस्ट्यूम में ओरिजिनल कच्छी वर्क और पैच वर्क किया गया गै, जो आज दुनिया में सबसे महंगी कलाओं में से एक मानी जाती है। यहां जितने भी कलाकार आए हैं, उन्होंने ये पोशाकें खुद बनवाई हैं, खुद हजारों रुपये खर्च किए हैं। इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि हम गुजराती हैं, यह गुजरात का त्योहार है। मां अम्बा की आराधना के लिए हमें नौ दिन भी कम लगते हैं।"

उन्होंने कहा, "इस आयोजन के लिए ग्रुप पिछले एक महीने से लगातार अभ्यास कर रहा है। हम गरबा के ओरिजिनल स्टेप्स कैसे करते हैं। हमारी कोशिश यही है कि असली गरबा जीवित रहे। हम आज भी अपनी परंपरागत पोशाक पहनकर ही गरबा करते हैं। हमारी ताली और चपटी, जो हमारा पारंपरिक ट्रेडिशन है, उसे हमने पीढ़ी-दर-पीढ़ी संभालने का संकल्प लिया है। हमारे ग्रुप ने अब तक दुनिया के लगभग 37 देशों में पारंपरिक गरबा प्रस्तुत किया है। यह हमारे लिए, हमारे गुजरात और हमारे देश के लिए बहुत गौरव की बात है कि हमारे कलाकार हर साल विदेशी मंचों पर गरबा लेकर जाते हैं। हमने साबित कर दिया है कि यूनेस्को में गरबा को जो मान्यता मिली है, वह बिल्कुल सही है। विदेश में भी लोग इसे बहुत पसंद करते हैं।"

पनघट परफॉर्मिंग आर्ट्स से जुड़े अर्पित योगेश भाई भट्ट ने बताया कि वे पिछले 15 सालों से इस ग्रुप का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, "गरबा एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए नौ दिनों तक भगवती माता जी की आराधना कर सकते हैं।"

16 वर्षीय युवा कलाकार शगुन प्रजापति ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "मैं काफी समय से पनघट ग्रुप से जुड़ी हुई हूं। गरबा मेरे लिए बहुत ज्यादा स्पेशल है। नवरात्रि का त्योहार माता की भक्ति का सबसे बड़ा अनुभव है। पनघट में हम जो पारंपरिक गरबा करते हैं, उसमें हम अपने कल्चर को कॉस्ट्यूम के साथ जोड़कर रखते हैं। यह बहुत अच्छी बात है कि हम गुजराती कल्चर को रिप्रेजेंट करते हैं।"

ग्रुप की एक अन्य महिला कलाकार पल ने मौजूदा समय में आ रहे बदलावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "पहले के कल्चर में अब काफी बदलाव आ गए हैं लेकिन हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेज कर रखना चाहिए। आज की जनरेशन को गरबा का असली मतलब ही नहीं पता। आज सोशल मीडिया के कारण ऐसा हो गया है कि लोग सिर्फ फोटो खिंचवाने, सजावट देखने और दो-तीन बार गरबा करके निकल जाते हैं। हालांकि गरबा सिर्फ देखने या सुनने के लिए नहीं बना है। अगर आप इसे दिल से नहीं करते, तो इसका कोई मतलब नहीं रह जाता। यह नौ दिन का त्योहार माता जी की भक्ति का त्योहार है और उसके बिना हर चीज अधूरी है। जब कंटेंट बनता है, तो भक्ति पीछे छूट जाती है। "