नई दिल्ली। पूर्व राज्यसभा सदस्य हरनाम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगरा मंडल शिक्षक विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की हार का कारण 'अनुपयुक्त उम्मीदवार' का चयन बताया है। उनका कहना है कि नामांकन की घोषणा होते ही पार्टी की हार लगभग तय हो गई थी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यादव ने उम्मीदवार के चयन पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उस व्यक्ति का क्षेत्र के शिक्षकों से कोई संबंध नहीं था; उसने कभी उनकी चिंताओं को नहीं उठाया और शिक्षक समुदाय की समस्याओं की उसे कोई समझ नहीं थी।
उन्होंने लिखा कि यह समझ से परे है कि ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार क्यों चुना गया।
यादव ने जोर देकर कहा कि मतदाताओं से कटे हुए उम्मीदवार को मैदान में उतारने का निर्णय निर्णायक साबित हुआ।
उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा उम्मीदवार का नाम घोषित होते ही चुनाव परिणाम लगभग पार्टी के खिलाफ तय हो गया था।
पूर्व सांसद ने पार्टी नेतृत्व से उन सभी सीटों पर हार के कारणों की गंभीरता से समीक्षा करने का आह्वान किया जहां भाजपा का प्रदर्शन खराब रहा।
भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर देते हुए यादव ने नेतृत्व से उम्मीदवारों के चयन में अत्यधिक सावधानी बरतने का आग्रह किया।
उन्होंने संकेत दिया कि संबंधित समुदाय से वास्तविक जुड़ाव रखने वाले और उनकी समस्याओं को हल करने का अच्छा रिकॉर्ड रखने वाले व्यक्तियों को चुनावी सफलता के लिए मैदान में उतारना आवश्यक है।
पूर्व राज्यसभा सदस्य की ये टिप्पणियां हाल ही में हुए एमएलसी चुनाव परिणामों की पृष्ठभूमि में आई हैं, जिनमें भाजपा को कुछ शिक्षक बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में झटका लगा है।
यादव की सार्वजनिक आलोचना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह टिकट वितरण प्रक्रिया को लेकर आंतरिक असंतोष को दर्शाती है।
यादव के बयान से पार्टी के कुछ वर्गों के इस विचार की ओर इशारा मिलता है कि आगरा मंडल में हार के लिए व्यापक राजनीतिक रुझानों के बजाय संगठनात्मक निर्णय जिम्मेदार थे।
भाजपा नेतृत्व ने अभी तक यादव की टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि आंतरिक आकलन के हिस्से के रूप में चुनाव के बाद विभिन्न हितधारकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं की आमतौर पर जांच की जाती है।













