सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के ब्रिजिशनगर इलाके में मुख्य सड़क की जर्जर हालत और पानी से भरे जानलेवा गड्ढों को लेकर ग्रामीणों और युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा। बार-बार की शिकायतों और प्रशासनिक अनदेखी से परेशान होकर रविवार को ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन का अनूठा तरीका अपनाया। लोगों ने मुख्य मार्ग पर बने पानी से लबालब गड्ढों के बीचोबीच पौधे रोप दिए, ताकि सोए हुए ग्राम पंचायत प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुल सके।


पहली बारिश में ही बही गिट्टी-मुरुम, लीपापोती की खुली पोल

स्थानीय निवासियों ने बताया कि कुछ दिन पहले ही ग्राम पंचायत द्वारा सड़क के इन गड्ढों को भरने के नाम पर गिट्टी और मुरुम डलवाई गई थी। हालांकि, यह मरम्मत महज दिखावा साबित हुई। हाल ही में हुई बारिश के पानी के तेज बहाव में सारा मुरुम बह गया और सड़क पर पहले से भी अधिक गहरे गड्ढे उभर आए। वर्तमान में इन गड्ढों में पानी भरा होने के कारण आए दिन बाइक सवार और राहगीर फिसलकर गिर रहे हैं और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।


कैबिनेट मंत्रियों के दौरे के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने बताया कि बीते 13 अगस्त को ही ब्रिजिशनगर में राज्यस्तरीय 'जनसमस्या निवारण शिविर' का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में राज्य मंत्री कृष्णा गौर और राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा स्वयं शामिल हुए थे। इसके बावजूद बस स्टैंड के ठीक पास स्थित इन जानलेवा गड्ढों की ओर न तो किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान गया और न ही किसी वरिष्ठ अधिकारी ने इनकी सुध ली।


बजट और सुनवाई न होने का आरोप, पक्के निर्माण की मांग

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत प्रशासन स्थाई समाधान करने के बजाय केवल मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर रहा है। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी पंचायत अधिकारियों का कहना होता है कि उनके पास इस कार्य के लिए समय और पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है। लगातार हो रहे हादसों से आक्रोशित युवाओं ने अब मांग की है कि दिखावटी मरम्मत बंद कर गिट्टी और मुरुम के साथ सड़क का पक्का निर्माण कराया जाए, ताकि राहगीरों को रोज-रोज के जानलेवा डर से मुक्ति मिल सके।