बालाघाट, रितेश सोनी। अंतर्राष्ट्रीय संत बौद्धिक मंच के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी स्वदेशानंद ब्रह्म गिरि महाराज ने संसद परिसर में भगवा वस्त्र से जुड़े कथित प्रदर्शन पर नाराजगी जताते हुए इसे साधु-संतों और सनातन परंपरा का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि सांसद एक संवैधानिक और गरिमापूर्ण पद है तथा संसद जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
स्वामी स्वदेशानंद ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान एक सांसद को भगवा वस्त्र पहनाकर उसके साथ कथित रूप से मारपीट और अपमानजनक व्यवहार का दृश्य प्रस्तुत किया गया तथा उसका सिर एक नेता के पैरों में रखवाकर माफी मांगने का प्रदर्शन किया गया। उन्होंने कहा कि संत समाज इसे भगवा वस्त्र और साधु-संतों के अपमान के रूप में देखता है और इसे स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने कहा, “साधु-संतों का अपमान तो ईश्वर भी माफ नहीं करते। अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन आंदोलन के नाम पर संतों और सनातन परंपरा का अपमान उचित नहीं है।” उन्होंने संबंधित सांसदों से संत समाज से माफी मांगने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर संत समाज लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा।
स्वामी स्वदेशानंद ने कहा कि साधु-संत सामान्यतः शांत रहते हैं, लेकिन उनकी आस्था और सम्मान को लगातार ठेस पहुंचाए जाने पर संत समाज अपनी आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
पप्पू यादव की सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी
स्वामी स्वदेशानंद ब्रह्म गिरि महाराज ने बताया कि 2 अगस्त 2026 को दिल्ली के कनॉट प्लेस में संत समाज की बैठक आयोजित की गई। उनके अनुसार बैठक में सांसद पप्पू यादव के खिलाफ आंदोलन करने तथा उनकी संसद सदस्यता समाप्त करने की मांग उठाने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने दावा किया कि बैठक में देशभर के हिंदू संगठनों और संत संगठनों को एक मंच पर लाकर दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई गई है। संत समाज का लक्ष्य करीब 20 लाख लोगों को दिल्ली में एकत्रित करने का रखा गया है। आंदोलन के दौरान राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग करने की बात कही गई है।
स्वामी स्वदेशानंद के मुताबिक आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए संत समाज के प्रतिनिधि देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकें करेंगे तथा सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के माध्यम से विभिन्न हिंदू एवं संत संगठनों से संपर्क किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और आंदोलन का अधिकार सभी को है, लेकिन धार्मिक प्रतीकों और संत परंपरा का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। संत समाज अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाएगा।




