बर्लिन। जर्मनी में रविवार को बर्लिन और मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में रविवार को हो रहे राज्य चुनावों पर देश ही नहीं पूरी दुनिया की नजर है। इन चुनावों को चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और उनकी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक अग्निपरीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। हाल ही में सैक्सोनी-आनहाल्ट में दक्षिणपंथी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) की रिकॉर्ड जीत के बाद मर्ज पर दबाव और बढ़ गया है।
मर्ज को चांसलर बने अभी करीब 16 महीने ही हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार को अर्थव्यवस्था, महंगाई, सामाजिक कल्याण सुधारों और प्रवासन जैसे मुद्दों पर लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच एएफडी का बढ़ता जनसमर्थन जर्मनी की मुख्यधारा की पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
करीब 25 लाख मतदाता स्थानीय समयानुसार सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक (सीईएसटी) अपने मत का प्रयोग करेंगे।
इस महीने की शुरुआत में सैक्सोनी-आनहाल्ट के चुनाव में एएफडी को करीब 44 फीसदी वोट मिले थे। यह किसी जर्मन राज्य चुनाव में पार्टी का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन था। सीडीयू करीब 17 फीसदी वोट के साथ काफी पीछे रह गई। इस नतीजे ने मर्ज की पार्टी के भीतर भी चिंता बढ़ा दी। मर्ज ने एक बयान में कहा था कि परिणाम ने सीडीयू को उसकी बुनियाद तक हिला दिया है, लेकिन उन्होंने पद छोड़ने से इनकार करते हुए सरकार की नीतियों पर काम जारी रखने की बात कही।
अब बर्लिन और मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया के चुनाव उस राजनीतिक माहौल में हो रहे हैं, जिसमें एएफडी को पूर्वी जर्मनी में खास तौर पर मजबूत समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में एएफडी और केंद्र-वाम सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री मनुएला श्वेसिग की एसपीडी ने चुनाव अभियान के दौरान अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है।
इस चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू सीडीयू की स्थिति भी है। पार्टी के लिए चिंता सिर्फ एएफडी की बढ़त नहीं है, बल्कि यह भी है कि उसके खराब प्रदर्शन की स्थिति में मर्ज के नेतृत्व को लेकर सीडीयू के भीतर सवाल और तेज हो सकते हैं। रॉयटर्स के अनुसार, पार्टी के भीतर मर्ज की नेतृत्व क्षमता को लेकर पहले से चर्चा चल रही है।
बर्लिन की तस्वीर कुछ अलग है। यहां मुकाबला सीडीयू, वामपंथी डाई लिंके और एएफडी के बीच कड़ा बना हुआ है। राजधानी में चुनाव अभियान का एक बड़ा मुद्दा आवास और बढ़ता किराया है। बर्लिन में 2014 के बाद से किराए में भारी वृद्धि हुई है और शहर को आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में नए घरों की जरूरत बताई जा रही है।
इन चुनावों का असर केवल राज्य सरकारों तक सीमित नहीं माना जा रहा। जर्मनी में राज्य चुनावों का इस्तेमाल अक्सर संघीय सरकार के प्रति जनता के रुझान को समझने के लिए भी किया जाता है। ऐसे में यदि सीडीयू को दोनों राज्यों में कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ता है, तो मर्ज के लिए पार्टी के भीतर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इन चुनावों के नतीजे अपने आप संघीय चांसलर को पद से नहीं हटाते।
मर्ज़ की मुश्किल इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि उनकी सरकार में शामिल एसपीडी और सीडीयू के बीच कुछ आर्थिक और सामाजिक नीतियों को लेकर मतभेद सामने आए हैं। सरकार सामाजिक कल्याण व्यवस्था, पेंशन और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधारों की दिशा में कदम उठाना चाहती है, लेकिन इन सुधारों की राजनीतिक कीमत को लेकर गठबंधन के भीतर भी चिंता है।
दूसरी ओर एएफडी की लोकप्रियता बढ़ने के साथ जर्मनी की पारंपरिक पार्टियों की वर्षों पुरानी रणनीति भी चर्चा में है। मुख्यधारा की पार्टियां अब तक एएफडी के साथ औपचारिक गठबंधन या सत्ता में साझेदारी से दूरी बनाए रखने की नीति अपनाती रही हैं। इसे राजनीतिक तौर पर 'फायरवॉल' रणनीति कहा जाता है। हाल के चुनावी परिणामों ने इस रणनीति की प्रभावशीलता को लेकर बहस तेज कर दी है।
एएफडी की बढ़त के पीछे प्रवासन के साथ-साथ आर्थिक असंतोष भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन रहा है। पूर्वी जर्मनी के कई इलाकों में उद्योग, रोजगार और जनसंख्या से जुड़े सवालों ने राजनीतिक असंतोष को बढ़ाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी जर्मनी में एएफडी के बढ़ते समर्थन को लेकर प्रवासी समुदायों में भी चिंता बढ़ रही है।
मर्ज ने हालांकि संकेत दिया है कि वह दबाव के बावजूद अपनी सरकार और सुधार एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे। उनका तर्क है कि जर्मनी की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करना ही सरकार के सामने मौजूद राजनीतिक चुनौतियों से निपटने का रास्ता है। साथ ही वह यूरोप की सुरक्षा और यूक्रेन के मुद्दे पर अपनी मौजूदा विदेश नीति जारी रखने पर भी जोर देते रहे हैं।
रविवार के चुनाव इसलिए जर्मनी की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। इनके नतीजे यह बताएंगे कि सैक्सोनी-आनहाल्ट में एएफडी की सफलता एक राज्य तक सीमित रही या पूर्वी जर्मनी के अन्य हिस्सों में भी उसका प्रभाव और मजबूत हुआ। साथ ही सीडीयू के प्रदर्शन से यह संकेत मिलेगा कि मर्ज की पार्टी अपने पारंपरिक मतदाताओं को अपने साथ बनाए रखने में किस स्थिति में है।




