इस्लामाबाद। पाकिस्तान में हालात ठीक नहीं हैं; बलूचिस्तान और पीओके जल रहा है, तो पूर्व वजीर-ए-आजम जेल में कैद हैं। अर्थव्यवस्था भी विश्व बैंक के सहारे घिसट-घिसट कर चल रही है। इस बीच प्रमुख विपक्षी पार्टी पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ और जमात-ए-इस्लामी (जेआई) ने अलग-अलग धरना प्रदर्शन का ऐलान कर दिया।

पीटीआई ने अपने नेता इमरान खान की रिहाई, संविधान और देश में कानून के राज को लेकर 27 सितंबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तो जेआई ने इससे इतर इस्लामाबाद मार्च की घोषणा की है।

इस बीच, इस्लामाबाद पुलिस ने पीटीआई के चार कार्यकर्ताओं और सदस्यों को हिरासत में ले लिया है।

पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक 'डॉन' ने बताया कि एक सब-इंस्पेक्टर की शिकायत पर इन कार्यकर्ताओं को अलग-अलग आरोपों में गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार उन्हें सूचना मिली थी कि पीटीआई कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में बैठक कर रहे हैं। दावा है कि जब पुलिस ने बैठक स्थल पर छापा मारा, तो कार्यकर्ताओं ने पुलिस टीम के साथ मारपीट की, उनकी वर्दी फाड़ दी और उन्हें बंधक बना लिया। पुलिस और राजधानी प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पीटीआई के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का मुकाबला करने की तैयारी शुरू कर दी है।

सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और विरोध प्रदर्शन को रोकने की योजना बनाने के लिए इस्लामाबाद के सेंट्रल पुलिस ऑफिस में एक बैठक हुई।

पुलिस विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी भी इकट्ठा कर रही थी, जिसमें राजनीतिक पार्टी की तैयारियां और उसके नेताओं, कार्यकर्ताओं और सदस्यों की गतिविधियां शामिल थीं। गेस्ट हाउस, सराय, बस टर्मिनल और उन संभावित ठेकेदारों पर नजर रखी जा रही थी जो विरोध प्रदर्शन के लिए भोजन, पानी, रहने की जगह और परिवहन की व्यवस्था कर सकते थे। पुलिस की खुफिया शाखाएं/इकाइयां - स्पेशल ब्रांच और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट भी सतर्क हैं।

वे पीटीआई के उन नेताओं, सदस्यों और कार्यकर्ताओं की जानकारी भी इकट्ठा कर रहे हैं जिनका विवरण उनके पास उपलब्ध है। उन नेताओं, सदस्यों और कार्यकर्ताओं के घरों और अन्य जगहों के आसपास भी निगरानी रखी जा रही है जहां वे गिरफ्तारी से बचने के लिए रह रहे हैं या ठहरे हुए हैं।

दूसरी ओर देश के वित्त मंत्री औरंगजेब का तर्क है कि धरना-प्रदर्शन से देश के सरकारी खजाने को रोजाना 120 अरब रुपये का नुकसान हो सकता है।

जियो न्यूज के अनुसार, रविवार को अपने संदेश में औरंगजेब ने कहा कि ऐसे विरोध-प्रदर्शनों को समझना मुश्किल है, खासकर तब जब पाकिस्तान ने आर्थिक स्थिरता हासिल करने के लिए काफी कोशिशें की हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आर्थिक गतिविधियों में रुकावट से देश की स्थिरता से आर्थिक विकास की ओर बढ़ने की प्रक्रिया कमजोर हो सकती है।