बालाघाट, रितेश सोनी: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिला चिकित्सालय के ट्रामा सेंटर में चिकित्सकीय लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। प्रसव के दौरान ऑपरेशन में डॉक्टरों की बड़ी चूक के कारण एक 26 वर्षीय महिला की बच्चेदानी (यूटरस) तक निकालनी पड़ गई, जिससे वह अब जीवन में कभी मां नहीं बन सकेगी। इस अमानवीय लापरवाही से गुस्साए परिजनों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को लिखित शिकायत सौंपकर संबंधित महिला चिकित्सक और कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने की मांग की है।
ऑपरेशन के बाद नहीं की बच्चेदानी की सिलाई, घर भेज दिया डिस्चार्ज कर
मामला खैरलांजी तहसील के ग्राम साकड़ी का है। यहां रहने वाले योगेंद्र गाडेकर की 26 वर्षीय पत्नी ज्योति गाडेकर को प्रसव पीड़ा के चलते 10 अक्टूबर को बालाघाट जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया, जिससे ज्योति ने एक बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने 14 अक्टूबर को महिला को स्वस्थ बताकर डिस्चार्ज कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान महिला की बच्चेदानी की सिलाई ही नहीं की थी और उसे उसी गंभीर हालत में घर भेज दिया गया। घाव खुला रहने के कारण महिला के पेट में मवाद भर गया और धीरे-धीरे पूरे शरीर में खतरनाक संक्रमण फैल गया।
निजी अस्पताल में दोबारा कराना पड़ा ऑपरेशन, जान बचाने के लिए निकाला यूटरस
घर लौटने के बाद ज्योति की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए परिजन उसे तुरंत बालाघाट के हनुमान चौक स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां जब डॉक्टरों ने जांच की तो संक्रमण की भयावह स्थिति सामने आई। महिला की जान बचाने के लिए डॉक्टरों के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा कि वे उसका दोबारा ऑपरेशन कर उसकी बच्चेदानी को बाहर निकालें। इस गंभीर लापरवाही के कारण ज्योति अब भविष्य में कभी मां नहीं बन पाएगी।
ऑपरेशन के नाम पर आशा कार्यकर्ता के जरिए वसूले 6 हजार रुपये
इस पूरे प्रकरण में केवल डॉक्टरों की लापरवाही ही सामने नहीं आई है, बल्कि पैसों के लेनदेन का भी गंभीर आरोप लगा है। परिजनों की शिकायत के मुताबिक, प्रसव के दौरान ऑपरेशन के नाम पर आशा कार्यकर्ता मंजू (पति अशोक दांदरे) द्वारा 6,000 रुपये वसूले गए थे। परिजनों का आरोप है कि उनसे यह कहकर पैसे लिए गए थे कि केस बिगड़ गया है, इसलिए इसकी जानकारी किसी को न दी जाए।
सीएमएचओ को सौंपा ज्ञापन, लाइसेंस निरस्त करने और बर्खास्तगी की मांग
घटना से आक्रोशित परिजनों ने 21 अक्टूबर को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी शेंडे और संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों का मेडिकल लाइसेंस निरस्त करने, उन्हें तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर कठोर वैधानिक कार्रवाई करने की मांग उठाई है। साथ ही, पैसे वसूलने के आरोपों से घिरी आशा कार्यकर्ता पर भी शिकंजा कसने की अपील की गई है। सरकारी अस्पतालों में इस तरह की संवेदनहीनता और लापरवाही ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है, और अब देखना यह होगा कि विभाग इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।
















