छतरपुर/खजुराहो, तुलसीदास सोनी। मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा संचालित आदिवर्त जनजातीय एवं लोककला राज्य संग्रहालय, खजुराहो में साप्ताहिक सांस्कृतिक श्रृंखला ‘देशज’ के अंतर्गत 04 अक्टूबर 2026 को बुंदेलखंड क्षेत्र की पारंपरिक लोकधारा पर आधारित लोकगीत एवं कोलदहका जनजातीय नृत्य की गरिमापूर्ण प्रस्तुतियाँ संपन्न हुईं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं आमंत्रित कलाकारों के पारंपरिक सम्मान के साथ किया गया।
नीरज अहिरवार ने गाए बुंदेली लोकगीत
प्रथम प्रस्तुति श्री नीरज अहिरवार (महाराजपुर) की रही। उन्होंने देवी भगत गीत, कार्तिक गीत, बनरा गीत एवं बिलवारी जैसे पारंपरिक बुंदेली लोकगीतों का सुसंस्कृत एवं प्रभावपूर्ण गायन प्रस्तुत किया। उनके गायन ने पूरे वातावरण को लोकसंगीत की आत्मीयता से सराबोर कर दिया।
कुशुमकली कोल ने प्रस्तुत किया काली खप्पर नृत्य
द्वितीय प्रस्तुति सुश्री कुशुमकली कोल (सीधी) द्वारा कली खप्पर नृत्य की रही। काली खप्पर नृत्य मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र का अत्यंत प्रसिद्ध पारंपरिक धार्मिक एवं लोक नृत्य है। यह विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान जवारा विसर्जन के समय माँ काली की उपासना के रूप में किया जाता है। इस नृत्य में मुख्य नर्तक अपने हाथ में मिट्टी का खप्पर (पात्र) लेकर नृत्य करता है, जिसमें आग या जलते हुए अंगारे होते हैं। ढोल, नगाड़े और मृदंग की तीव्र थापों से पूरा माहौल भक्तिमय एवं ओजपूर्ण हो उठता है। कुशुमकली कोल की प्रस्तुति ने जनजातीय ऊर्जा को मंच पर जीवंत कर दिया।
मालती आठ्या के गीतों पर तालियाँ
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति सुश्री मालती आठ्या (दमोह) द्वारा बुंदेली लोकगीतों की रही। उन्होंने देवी गीत, कहरवा, गारी एवं चेतावनी जैसे विविध पारंपरिक गीतों का प्रभावशाली एवं अनुशासित प्रस्तुतीकरण किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।











