रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ को लेकर प्रदेश में धान की फसल पर संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में चक्रवात को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आईएएनएस से कहा, "छत्तीसगढ़ में भी इसके आने का अलर्ट है। छत्तीसगढ़ किसानों का और धान की खेती करने वाला प्रदेश है, 80 प्रतिशत किसान धान की ही फसल लगाते हैं। इस समय धान पूरी तरह से या तो पक चुका है या पकने की स्थिति में है। यदि अभी ज्यादा तूफान और बारिश आती है, तो फसलों की बड़ी क्षति होगी।"

उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए चिंता का विषय है। वैसे इससे एहतियातन निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने काफी निर्देश दिए हैं, हमारी पूरी तैयारी की है और कोई उपाय नहीं है जो हम इसको बचा सके सिर्फ भगवान का भरोसा है।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए श्याम बिहारी जायसवाल ने उनकी भाषा शैली की आलोचना की। उन्होंने कहा कि महुआ मोइत्रा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से इस तरह की बयानबाजी उचित नहीं है। सत्ता की लालसा में विपक्षी नेता अपनी भाषा और मर्यादा का ध्यान नहीं रख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं के बयानों को देश की जनता के साथ-साथ दुनिया भर के लोग भी देख रहे हैं। सार्वजनिक जीवन में नेताओं को अपनी भाषा की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की रैली को लेकर भी मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का इतिहास लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति असम्मान का रहा है।

मंत्री जायसवाल ने जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने पर विपक्षी दल कभी ईवीएम, कभी एसआईआर और कभी निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर विपक्ष के रुख की भी आलोचना की। विपक्ष की ऐसी बयानबाजी से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। अंततः सत्य और धर्म की जीत होगी तथा अधर्म की हार होगी। इतिहास में अधर्म के रास्ते पर चलने वालों का अंत हमेशा बुरा हुआ है।