जम्मू। नवरात्र के शुभ अवसर पर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित प्राचीन और प्रसिद्ध 'टाली वाली माता मंदिर' में हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं। जम्मू जिले के मढ़ गांव में स्थित इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और माता काली की पूजा-अर्चना कर शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।
श्रद्धालु मानसी चौधरी ने आईएएनएस से कहा, "जब यहां श्रद्धालु नारे लगाते हैं, तो उनकी आवाज पाकिस्तान बॉर्डर तक सुनाई देती है। नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में लोग मंदिर आ रहे हैं और नौवें दिन भीड़ के और बढ़ने की उम्मीद है। इतिहास में इस मंदिर पर आज तक कोई हमला नहीं हुआ और न ही कोई धमाका हुआ। इस मंदिर में सेना के जवान भी दर्शन-पूजन करने आते हैं।"
एक महिला श्रद्धालु ने कहा, "जीरो प्वाइंट पर स्थित इस मंदिर पर आर्मी के जवानों के साथ-साथ दूर-दूर से लोग यहां माथा टेकने आते हैं। पड़ोसी मुल्क की ओर से की गई फायरिंग और हमलों में आज तक मंदिर और इससे सटे गांव को कोई नुकसान नहीं हुआ। इस मंदिर में आने वाले लोगों की मुरादें काली माता पूरी करती हैं। नवमी के दिन यहां काफी भीड़ होती है और दिन भर लंगर चलता है। मंदिर में लगने वाले नारों और भजन-कीर्तन की आवाज पाकिस्तान तक पहुंचती है। इस मंदिर में हर धर्म के लोग आते हैं। मुस्लिम समाज के लोग भी मंदिर में सेवा करते हैं।"
सुरेंद्र शर्मा ने कहा, "जीरो प्वाइंट पर स्थित टाली वाली माता मंदिर में लगने वाले नारों की गूंज पाकिस्तान तक सुनाई देती है। इस मंदिर में सरदार, मुस्लिम सहित अन्य मजहब के लोग आते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। हर नवरात्रि पर यह मेला लगता है।"
बता दें कि टाली वाली माता मंदिर जम्मू से करीब 25 किलोमीटर दूर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित एक प्रसिद्ध और चमत्कारी मंदिर है। यह मंदिर एक प्राचीन टाली (शीशम) के पेड़ के नीचे और उसी के भीतर स्थित है, इसलिए इसे 'टाली वाली माता' कहा जाता है। मान्यता है कि यह पेड़ कभी नहीं सूखता।














