लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और 'लोकमान्य' की उपाधि से विभूषित बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोकमान्य तिलक के ऐतिहासिक योगदान को याद किया और उनके विचारों को राष्ट्रचेतना का मुख्य आधार बताया।


'स्वराज मंत्र' और राष्ट्रचेतना को नई दिशा

योगी आदित्यनाथ ने लोकमान्य तिलक के प्रसिद्ध उद्घोष को याद करते हुए कहा:


"स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" का अमर मंत्र देकर राष्ट्रचेतना को नई दिशा देने वाले, भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महानायक एवं प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक 'लोकमान्य' बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।


उन्होंने आगे कहा कि 'लोकमान्य' का जीवन राष्ट्रभक्ति का एक सर्वोच्च आदर्श है। उनका दिया गया 'स्वराज मंत्र' भारत की आत्मा का अमर स्वर है, जो हर भारतीय को देश सेवा और स्वाभिमान के साथ जीने की प्रेरणा देता रहेगा।


भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में लोकमान्य तिलक का योगदान

बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन अग्रदूतों में से थे, जिन्होंने जन-जागरण के लिए सांस्कृतिक और शैक्षणिक माध्यमों का अभूतपूर्व उपयोग किया:


जन-जागरण के माध्यम: उन्होंने गणेशोत्सव और शिवाजी महाराज जयंती जैसे आयोजनों को सार्वजनिक रूप देकर स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाया।


पत्रकारिता से चेतना: अपने समाचार पत्रों 'केसरी' (मराठी) और 'मराठा' (अंग्रेजी) के माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की नीतियों का निडरता से विरोध किया और भारतीयों में स्वाभिमान जगाया।


त्रिमूर्ति का हिस्सा: वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गरम दल के प्रसिद्ध 'लाल-बाल-पाल' (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चंद्र पाल) त्रिमूर्ति के प्रमुख स्तंभ थे।