छतरपुर। छतरपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) नमः शिवाय अरजरिया ने शासकीय कार्यों में घोर लापरवाही और लंबे समय से गैरहाजिर चल रहीं पंचायत सचिव पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। जनपद पंचायत लवकुशनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत बम्हौरी की तत्कालीन सचिव सुश्री प्रियंका तिवारी को बिना किसी पूर्व सूचना के लगातार 11 वर्षों से अनाधिकृत रूप से ड्यूटी से नदारद रहने के आरोप में पदच्युत (सेवा से बर्खास्त) कर दिया गया है। संबंधित सचिव जून 2015 से अपने दायित्वों से लगातार अनुपस्थित चल रही थीं।
विभागीय जानकारी के अनुसार, लापरवाही का यह मामला वर्ष 2015 से शुरू हुआ था। जनपद पंचायत लवकुशनगर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 18 जून 2015 को प्रस्तुत प्रतिवेदन में तत्कालीन सचिव प्रियंका तिवारी (उस समय पदस्थ ग्राम पंचायत पीरा) के खिलाफ शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में रुचि न लेने, जनपद स्तरीय समीक्षा बैठकों में गैरहाजिर रहने और पंचायत का कामकाज ठप करने की रिपोर्ट दी गई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए 29 जून 2015 को उन्हें निलंबित कर मुख्यालय जनपद पंचायत लवकुशनगर निर्धारित किया गया था। निलंबन अवधि में भी मुख्यालय पर आमद दर्ज न कराने पर जनपद सीईओ ने 20 जुलाई 2017 को उन्हें सेवा से पृथक करने की अनुशंसा भेजी थी।
इसके उपरांत जनपद पंचायत से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर 31 मई 2018 को उनका निलंबन समाप्त कर उन्हें ग्राम पंचायत बम्हौरी में पदस्थ किया गया, लेकिन बहाली के बाद भी वे कार्यभार ग्रहण करने नहीं पहुंचीं। इसके बाद 4 अगस्त 2018 को जारी आदेश के जरिए उन्हें जिला पंचायत छतरपुर कार्यालय में अटैच कर दिया गया और बम्हौरी पंचायत का प्रभार ग्राम रोजगार सहायक को सौंप दिया गया। जिला पंचायत कार्यालय में अटैच किए जाने के बावजूद जब वे उपस्थित नहीं हुईं, तो 7 अक्टूबर 2019 को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया।
निलंबन, बहाली और जिला मुख्यालय में संलग्नीकरण के तमाम आदेशों व नोटिसों को नजरअंदाज करते हुए सचिव प्रियंका तिवारी जून 2015 से लगातार अनुपस्थित बनी रहीं। अंततः मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया ने मध्य प्रदेश पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राजपत्र दिनांक 9 अगस्त 2017 के नियम-7 (अनुशासन एवं नियंत्रण) में निहित प्रावधानों के तहत सख्त कदम उठाते हुए उन्हें पंचायत सचिव के पद से विधिवत बर्खास्त कर दिया है। इस कड़ी कार्रवाई से पंचायत एवं ग्रामीण विकास महकमे में हड़कंप मच गया है।












