जयपुर। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शुक्रवार को भरतपुर में भूमि बंदोबस्त विभाग के दो पटवारियों को 30,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के मुताबिक एसीबी की भरतपुर यूनिट ने एक शिकायत पर कार्रवाई की। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पटवारी प्रदीप सिंह और दिगंबर सिंह, शिकायतकर्ता से उस कृषि भूमि की सीमा तय करने के बदले 50,000 रुपए की मांग कर रहे थे, जिसकी पैमाइश पहले ही हो चुकी थी। आरोप है कि रिश्वत के लिए दबाव बनाते समय आरोपियों ने शिकायतकर्ता और उनके परिवार के सदस्यों को परेशान किया।
शिकायत की पुष्टि के बाद एसीबी ने भरतपुर रेंज के डीआईजी ओमप्रकाश मीणा की देखरेख और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एसीबी भरतपुर) अमित सिंह के निर्देशन में जाल बिछाया। इस ऑपरेशन का नेतृत्व पुलिस इंस्पेक्टर महेंद्र सिंह ने किया। दोनों आरोपियों को मांगी गई रिश्वत के हिस्से के तौर पर 30,000 रुपए लेते हुए पकड़ा गया। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक एस. परिमला की देखरेख में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
एसीबी ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है और आगे की जांच जारी है। एसीबी ने जनता से अपील की है कि वे अपनी 24x7 टोल-फ्री हेल्पलाइन (1064) या वॉट्सऐप हेल्पलाइन (9413502834) के माध्यम से रिश्वतखोरी की घटनाओं की सूचना देकर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का समर्थन करें और नागरिकों को वैध सार्वजनिक सेवाएं प्राप्त करने में मदद का भरोसा दिलाया।
इससे पहले 7 जुलाई को एसीबी की चूरू यूनिट ने कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी), चूरू के डॉ. विकेंद्र कुमार (सचिव) और कमल कुमार (पर्यवेक्षक-सह-कैशियर) को 10,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
गोविंद गुप्ता ने बताया कि एसीबी चूरू यूनिट को उत्पीड़न और 20,000 रुपये की रिश्वत की मांग के बारे में शिकायत मिली थी। आरोपियों, विकेंद्र कुमार और कमल कुमार ने कथित तौर पर एपीएमसी चूरू परिसर में स्थित शिकायतकर्ता की फर्म को जारी किए गए नोटिस से संबंधित कार्यवाही को रोकने के बदले में यह रकम मांगी थी। नोटिस में साल 2019-20 और 2021 के लिए कैश बुक और अकाउंटिंग बिल जमा करने को कहा गया था।
इसके बाद एसीबी बीकानेर के डीआईजी नारायण टोगस की देखरेख और एसीबी चुरू के एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस महावीर प्रसाद शर्मा की अगुवाई में इस मांग की पुष्टि की गई। फिर एक जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को 10,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया और रिश्वत की यह रकम भी बरामद कर ली गई।




