नागोया। पैरा तैराक निरंजन मुकुंदन ने मंगलवार को एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की एसएम7 वर्ग की 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में एक और पदक डाला। निरंजन ने 2 मिनट 57.01 सेकंड का समय निकालते हुए तीसरा स्थान हासिल किया।

इस स्पर्धा का गोल्ड मेडल चीन के यिलॉन्ग झांग ने 2:37.69 के गेम्स रिकॉर्ड समय के साथ जीता, जबकि फिलीपींस के अर्नी गाविलन ने 2:52.72 के समय के साथ सिल्वर अपने नाम किया। फाइनल में शामिल एक अन्य भारतीय, सुयश नारायण जाधव 3:03.40 का समय निकालकर पांचवें स्थान पर रहे।

निरंजन मुकुंदन भारत के सबसे चर्चित पैरा तैराकों में से एक हैं, जिनके नाम 107 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मेडल हैं। किसी भारतीय पैरा तैराक द्वारा बनाए गए सबसे अधिक एशियन रिकॉर्ड (दो लॉन्ग-कोर्स और पांच शॉर्ट-कोर्स रिकॉर्ड) उन्हीं के नाम हैं। इनमें 200 मीटर बैकस्ट्रोक (आईडीएम बर्लिन 2018), 800 मीटर फ्रीस्टाइल (प्राग 2022) और 1500 मीटर फ्रीस्टाइल (नॉर्वे में 2023 बर्गन स्विम फेस्टिवल में 16 साल पुराने एशियन रिकॉर्ड को तोड़ना) शामिल हैं।

उन्होंने टोक्यो 2020 पैरालंपिक गेम्स में पुरुषों की 50 मीटर बटरफ्लाई (एस7) स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उनके शुरुआती करियर में कई शानदार अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन देखने को मिले हैं। साल 2015 के आईडब्ल्यूएएस जूनियर वर्ल्ड गेम्स में उन्होंने 10 मेडल (सात गोल्ड, तीन सिल्वर) जीतकर जूनियर वर्ल्ड चैंपियन का खिताब हासिल किया था।

इसके बाद, 2016 के आईडब्ल्यूएएस अंडर-23 वर्ल्ड गेम्स में उन्होंने 8 मेडल जीते थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, मुकुंदन ने लगातार विश्व-स्तरीय प्रदर्शन किया है। इसमें 2014 इंचियोन एशियन पैरा गेम्स में 4×100 मीटर मेडले रिले में जीता गया ब्रॉन्ज मेडल, 2023 बर्लिन वर्ल्ड सीरीज में जीते गए 6 मेडल, और नॉर्वे में 2024 बर्गन स्विम फेस्टिवल में जीते गए 7 मेडल शामिल हैं। बर्गन स्विम फेस्टिवल में उन्होंने 1500 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 16 साल पुराना एशियन रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।

बेंगलुरु में जन्मे मुकुंदन 'स्पाइना बिफिडा' (रीढ़ की हड्डी का अधूरा विकास) और 'क्लबड फीट' (पैरों की जन्मजात विकृति) के साथ पैदा हुए थे। पांच साल की उम्र तक उनकी कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त था और अब तक उनकी 19 सुधारात्मक सर्जरी हो चुकी हैं।

2003 में पैर की एक बड़ी सर्जरी के बाद, डॉक्टरों ने उनके माता-पिता को सलाह दी कि वे मुकुंदन को घुड़सवारी या एक्वा थेरेपी (पानी में की जाने वाली थेरेपी) में शामिल कराएं, ताकि उनके शरीर के निचले हिस्से की ताकत बढ़ सके। उन्होंने स्विमिंग पूल को चुना और जयनगर में कोच जॉन क्रिस्टोफर की देखरेख में तैराकी शुरू की। सिर्फ तीन महीनों के भीतर ही उन्होंने रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) के लिए की जाने वाली तैराकी से आगे बढ़कर प्रतिस्पर्धी पैरा-तैराकी में कदम रखा।