संयुक्त राष्ट्र। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा और अनाज से जुड़े सीमित युद्धविराम की संभावना तलाशने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने कहा कि दोनों देश युद्ध के दौरान ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमलों को अपनी सैन्य रणनीति का हिस्सा मानते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में रुबियो ने कहा कि मेरा मानना है कि दोनों पक्षों ने ऐसे सीमित युद्धविराम में दिलचस्पी दिखाई है, जिसमें अनाज और ऊर्जा से जुड़े मुद्दे शामिल हों।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की इस विचार को सार्वजनिक रूप से भी उठा चुके हैं और अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत में भी इसका जिक्र कर चुके हैं।
हालांकि, रुबियो ने किसी औपचारिक प्रस्ताव का ऐलान नहीं किया और न ही यह कहा कि रूस और यूक्रेन इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका की दोनों पक्षों के साथ बातचीत में यह मुद्दा सामने आया है। इसमें मॉस्को में स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर की भागीदारी वाली बैठक और जेलेंस्की के साथ हुई बातचीत भी शामिल है।
रुबियो के मुताबिक, अगर अमेरिका इस मामले में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है, तो वह मदद करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि इस तरह का सीमित समझौता युद्ध को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, लेकिन इससे दूसरे देशों पर युद्ध की वजह से पड़ रहे कुछ दबाव को कम किया जा सकता है। साथ ही, यह आगे की बड़ी बातचीत के लिए एक शुरुआती कदम बन सकता है।
रुबियो ने कहा कि सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि रूस और यूक्रेन के लिए ऊर्जा से जुड़े ठिकानों का मतलब अलग-अलग है।
यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों और तेल-गैस सुविधाओं पर किए जाने वाले हमले रूस की कमाई के एक महत्वपूर्ण स्रोत को नुकसान पहुंचाते हैं। दूसरी ओर, रूस के यूक्रेन के बिजली नेटवर्क पर हमले सर्दियां नजदीक आने के साथ वहां बिजली की सप्लाई के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं।
रुबियो ने कहा, "इसलिए जब आप ऊर्जा की बात करते हैं, तो अलग-अलग पक्षों के लिए इसका मतलब अलग है।"
रुबियो के मुताबिक, रूस और यूक्रेन दोनों ही इन ठिकानों को अपने सैन्य मकसद से जुड़ा हुआ मानते हैं। यही वजह है कि दोनों पक्षों को कुछ फायदा दिखाई देने के बावजूद सीमित समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि तेल और गैस से जुड़े ठिकानों पर हमलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है, जबकि यूक्रेन के बिजली नेटवर्क पर हमलों का सीधा असर वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है।
रुबियो ने यह नहीं बताया कि अमेरिका ने दोनों में से किसी पक्ष से किसी खास तरह के हमले रोकने को कहा है या नहीं।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपनी बिजली सप्लाई की सुरक्षा को अपने लिए बेहद अहम मानेगा। वहीं, रूस अपने देश के अंदर काफी दूर स्थित महत्वपूर्ण उद्योगों पर भी हमलों का सामना कर रहा है।
रुबियो के मुताबिक, दोनों देशों की यही अलग-अलग चिंताएं बातचीत को जरूरी भी बनाती हैं, हालांकि इन्हीं वजहों से किसी समझौते तक पहुंचना मुश्किल भी है। रुबियो ने अमेरिका के हालिया संपर्कों को पहले से चल रही बातचीत का ही आगे का हिस्सा बताया।
उन्होंने बातचीत की पूरी जानकारी देने से इनकार किया और कहा कि इसे अभी किसी बड़ी कूटनीतिक सफलता या निर्णायक मोड़ के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।












