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ज्ञान के साथ नैतिकता, संवेदनशीलता और सेवा का भाव आवश्यक: राज्यपाल

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9 मार्च 2026, 04:03 pm IST
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भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि समग्र व्यक्तित्व के विकास के लिए ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता संवेदनशीलता और सेवा का भाव होना भी आवश्यक है। जीवन में बड़ा बनना अच्छी बात है, लेकिन अच्छा होना उससे भी बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती के विद्यालयों के पूर्व छात्र और आचार्य शिक्षा के क्षेत्र में सार्थक तथा मानव कल्याण से जुड़े पुनीत कार्यों में योगदान दे रहे हैं, जो विद्या भारती के संस्कारों का सुखद प्रतिफल है। विद्या भारती के पूर्व छात्रों ने विज्ञान, प्रशासन, शिक्षा, समाज सेवा और उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं।


राज्यपाल श्री पटेल विद्या भारती मध्य भारत प्रांत के भाऊराव देवरस सेवा न्यास द्वारा संचालित स्व. अर्चना शुक्ला स्मृति परीक्षाओं की तैयारी के संस्थान “समुत्कर्ष” के द्वितीय सत्र के शुभारम्भ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान प्रज्ञादीप, हर्षवर्धन नगर में किया गया। कार्यक्रम में विद्या भारती मध्य भारत प्रांत के संगठन मंत्री श्री निखिलेश महेश्वरी और भाऊराव देवरस सेवा न्यास के अध्यक्ष श्री बनवारी लाल सक्सेना मंचासीन थे।


राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि “तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें” जैसी भावना निष्ठा, त्याग और निःस्वार्थ भाव से समाज एवं राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित होने की प्रेरणा विद्या भारती की शिक्षा देती है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के युवाओं को तलाशने और उन्हें तराशने के प्रयासों को और अधिक विस्तारित किया जाना चाहिए। राष्ट्र सर्वोपरि के विचारों को समाज में व्यापक रूप से प्रसारित करने के प्रयासों को और विस्तावित किया जाना चाहिए।


राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि संसाधनों के अभाव में प्रतिभा अवसरों से वंचित नहीं रहे इस दिशा में परीक्षा की तैयारी की पहल सराहनीय है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "परीक्षा पे चर्चा" का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सबका साथ और सबका विश्वास महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने प्रबुद्ध वर्ग से आह्वान किया कि वे गरीब और वंचित वर्गों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संस्थागत विशेषज्ञता से लाभान्वित करने का प्रयास करें। विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि वे प्रतिदिन परिवार, विद्या भारती और संस्थान से प्राप्त ज्ञान एवं संस्कारों का स्मरण कर उन्हें अपने आचरण में उतारे। संस्थान द्वारा भविष्य निर्माण के लिए किए जा रहे सहयोग को जीवन भर ऋण के रूप में याद रखना जरूरी है। इस अवसर पर संस्थान की ओर से राज्यपाल का स्मृति-चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। पुस्तक विद्या भारती भी भेंट की गई।


विद्या भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री रविन्द्र कान्हरे ने कहा कि विद्या भारती द्वारा देशभर में लगभग 30 हजार विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मानक आधारित मूल्यांकन व्यवस्था लागू की गई है। आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों में नेटवर्क कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए नेटवर्क ऑपरेटर्स के साथ समन्वय के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में विद्या भारती की महत्वपूर्ण भूमिका रही है तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्स्थापित करने के लिए संगठन निरंतर कार्य कर रहा है।


कार्यक्रम में एसएससी में चयनित श्री नितिन शर्मा और राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा में चयनित सुश्री शालू अहिरवार ने अपने अनुभव साझा किए। श्री मधुर शर्मा ने “आओ हम बदलें वर्तमान” गीत प्रस्तुत किया स्वागत उद्बोधन समुत्कर्ष कोचिंग संस्थान के संयोजक श्रीसुधांशु गोयल ने दिया। संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दूरस्थ अंचलों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं आभार प्रदर्शन अटल बिहारी हिन्दी विश्वविद्यालय के निदेशक श्री आशीष जोशी ने किया।

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