बैतूल/चिचोली, सुरेन्द्र बावने। बैतूल जिले के चिचोली (जीन-दनोरा) स्थित हनुमंत शुगर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ नाम, पैकेजिंग, रंग संयोजन और डिजाइन की नकल कर घटिया गुणवत्ता की शक्कर बेचने का एक बड़ा मामला सामने आया है। मंदसौर की एक प्रतिष्ठित कंपनी की शिकायत के बाद केंद्रीय खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मिल पर दबिश देकर शक्कर के नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें विस्तृत परीक्षण के लिए मुंबई स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। इस मामले में शिकायतकर्ता पक्ष अब नकली लेबल के उपयोग को लेकर पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की तैयारी भी कर रहा है।


उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप

मंदसौर निवासी शिकायतकर्ता गौरव पोरवाल की ओर से उच्च न्यायालय के अधिवक्ता विनायक बालचंदानी ने खाद्य आयुक्त भोपाल को इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हनुमंत शुगर मिल द्वारा उनके ब्रांड से हूबहू मिलता-जुलता लेबल तैयार किया गया है। पैकेजिंग और डिजाइन की इस समानता के कारण बाजार में उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है, जिसका सीधा फायदा उठाकर मिल प्रबंधन अपना उत्पाद खपा रहा है।


मानकों पर खरी नहीं उतरी शक्कर

शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि उन्होंने निजी तौर पर एनएबीएल (NABL) मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में इस शक्कर की जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसके अनुसार शक्कर के नमूनों में 'सुक्रोज' की मात्रा निर्धारित मानकों से काफी कम और 'एक्सट्रेनियस मैटर' (बाहरी तत्व) निर्धारित सीमा से कहीं अधिक पाए गए हैं। इसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम का सीधा उल्लंघन बताते हुए ऐसे उत्पादों के निर्माण और वितरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।


कानूनी घेरे में मिल प्रबंधन

शिकायतकर्ता के अधिवक्ता विनायक ज्ञानचंदानी के अनुसार, केंद्रीय खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मिल पहुंचकर न केवल नमूने लिए, बल्कि प्रबंधन को उत्पाद वितरण से संबंधित आवश्यक निर्देश भी जारी किए हैं। खाद्य विभाग की कार्रवाई के साथ-साथ अब पुलिस में भी दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई जा रही है। यदि पुलिस द्वारा नकली लेबल और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया जाता है, तो मिल प्रबंधन के सामने गंभीर कानूनी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।


फिलहाल, प्रशासन और संबंधित पक्षों की निगाहें मुंबई की प्रयोगशाला से आने वाली आधिकारिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट में मानकों की पुष्टि होने के बाद ही विभाग आगे की कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। इस घटनाक्रम के बाद से क्षेत्रीय शक्कर व्यापारियों और मिल संचालकों में हड़कंप का माहौल है।