भोपाल, जीतेन्द्र यादव। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने प्रदेश सरकार पर डकैत उन्मूलन कानून के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर-चंबल और रीवा संभाग में करीब 15 साल पहले डकैतों की समस्या थी, लेकिन अब डकैत या कोई गैंग नहीं बची है। इसके बावजूद डकैत उन्मूलन अधिनियम का इस्तेमाल कर युवाओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में डकैत उन्मूलन के लिए कानून बनाया गया था। बाद में शिवराज सिंह चौहान ने डकैत समस्या समाप्त होने का ऐलान किया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में तत्कालीन गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने विधानसभा में इस कानून को समाप्त करने की घोषणा की थी, लेकिन कानून आज भी अस्तित्व में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि डकैत अधिनियम का इस्तेमाल कर करीब एक हजार युवाओं को जेलों में बंद किया जा चुका है। रौन क्षेत्र में पुलिस संरक्षण में कथित अवैध खनन का विरोध करने वालों पर छह मुकदमे दर्ज किए गए और उनमें डकैत उन्मूलन की धाराएं भी जोड़ दी गईं।
डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि जब सरकार खुद डकैत समस्या समाप्त होने की घोषणा कर चुकी है, तो ऐसे कानून को बनाए रखने की जरूरत क्या है। उन्होंने कहा कि फर्जी मुकदमों में डकैत उन्मूलन की धाराओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जाएगा और कांग्रेस विधायक विधानसभा में भी मुद्दा उठाएंगे।
उन्होंने दतिया की एक घटना का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच विवाद के दौरान 800 रुपये का मोबाइल गिरने के मामले में भी डकैत उन्मूलन की धारा लगा दी गई। डॉ. सिंह ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस मामले का संज्ञान लेकर कानून के कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में कार्रवाई करेंगे।




