इंदौर। मध्य प्रदेश में करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं और पढ़ाई के भारी तनाव के बीच विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर और चिंताजनक संकट बनकर उभरा है। राज्य विधानसभा में प्रस्तुत आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 13 दिसंबर 2023 से 20 जनवरी 2026 के बीच प्रदेश में कुल 987 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो बीते 26 महीनों में प्रदेश में औसतन हर दिन एक छात्र ने अपनी जीवनलीला समाप्त की है। हालांकि, इन दुखद घटनाओं में से कितनी वारदातें छात्रावासों के भीतर घटित हुईं, इसका अलग से कोई विशिष्ट सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस भयावह स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार की 'स्पंदन' मानसिक स्वास्थ्य नीति के तहत शिक्षण संस्थानों और हॉस्टलों में सुरक्षा प्रबंधों के साथ मनोवैज्ञानिक सहयोग प्रणाली को कड़ाई से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।


छात्रावासों में बदले जाएंगे सीलिंग फैन, लगाए जाएंगे टैंपर-प्रूफ पंखे

'स्पंदन' योजना के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत छात्रावासों के कमरों में लगे सामान्य सीलिंग पंखों को हटाकर विशेष प्रकार के टैंपर-प्रूफ (एंटी-सुसाइड) पंखे लगाए जाने का निर्णय लिया गया है। इन पंखों की बनावट इस प्रकार की होती है कि यदि इन पर सामान्य से अधिक भार पड़ता है, तो इनकी स्प्रिंग या रॉड का संतुलन तुरंत बदल जाता है और वे नीचे की ओर झुक जाते हैं। इससे किसी भी प्रकार के अनुचित उपयोग और जानलेवा कदम की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हॉस्टलों में अकेले रहने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के मद्देनजर इस तकनीकी बदलाव को बेहद अहम माना जा रहा है।


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सीसीटीवी कैमरों और मजबूत ग्रिल से बढ़ेगा सुरक्षा घेरा

पंखे बदलने की कवायद के साथ-साथ छात्रावासों और शैक्षणिक परिसरों के पूरे सुरक्षा ढांचे को अपग्रेड किया जाएगा। योजना के तहत हॉस्टल परिसरों, गलियारों और संवेदनशील हिस्सों में उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा बालकनियों और खुली खिड़कियों पर सुरक्षित लोहे की ग्रिल लगाने सहित अन्य एहतियाती इंतजाम पुख्ता किए जाएंगे। इन उपायों का प्राथमिक उद्देश्य छात्रों को एक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत अलर्ट होकर समय रहते सहायता पहुंचाना है।


100 से अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थानों में काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य

नई गाइडलाइंस के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। ऐसे सभी कॉलेज, विश्वविद्यालय और निजी कोचिंग संस्थान जहां 100 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, वहां योग्य मनोवैज्ञानिक अथवा प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर (Psychological Counselor) की नियुक्ति अनिवार्य रूप से करनी होगी। ये काउंसलर नियमित अंतराल पर विद्यार्थियों से संवाद करेंगे, उनके शैक्षणिक या निजी तनाव, अवसाद और फोबिया को पहचानेंगे तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सीय परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएंगे।


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प्रतिस्पर्धा और करियर का दबाव बन रहा वजह, संस्थानों ने शुरू की पहल

मनोवैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का मानना है कि परीक्षा के बेहतर परिणाम का पारिवारिक दबाव, करियर की अनिश्चितता, अंधी प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत समस्याएं युवाओं को गंभीर अवसाद की ओर धकेलती हैं। ऐसे नाज़ुक मोड़ पर समय रहते परिवार, शिक्षकों और सहपाठियों का भावनात्मक सहयोग बेहद कारगर साबित होता है। इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांत त्रिपाठी ने इस दिशा में सकारात्मक पहल की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'स्पंदन' योजना के तहत प्राप्त दिशा-निर्देशों का विश्वविद्यालय स्तर पर अक्षरशः पालन कराया जाएगा। विद्यार्थियों को तनावमुक्त वातावरण देने के लिए परिसरों में सुरक्षा मानकों को कड़ा करने के साथ-साथ मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय किया जाएगा।