छतरपुर,विनोद मिश्रा। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में गेहूं खरीदी को लेकर जमीनी हालात चिंताजनक नजर आ रहे हैं। सेवा सहकारी समितियों में किसानों को पंजीयन, स्लॉट बुकिंग और भंडारण जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। Peptech न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट में रामपुर और गौरगाय केंद्रों पर किसानों की परेशानी खुलकर सामने आई।


रामपुर सेवा सहकारी समिति में किसानों ने बताया कि पिछले 2–3 दिनों से वे केंद्र पर डेरा डाले हुए हैं, लेकिन उनका पंजीयन नहीं हो पा रहा है। किसानों का आरोप है कि केवल छोटे किसानों (लगभग 2 हेक्टेयर तक भूमि वाले) का ही पंजीयन किया जा रहा है, जबकि बड़े किसानों के लिए ऑनलाइन स्लॉट उपलब्ध नहीं हो रहे। इससे नाराज किसान खुले आसमान के नीचे कड़ी धूप में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।


समिति में 2000 क्विंटल गेहूं भंडारण की क्षमता है, लेकिन करीब 1000 क्विंटल गेहूं केवल रखा हुआ है यदि ऑनलाइन पंजीयन खुलता तो समिति केंद्रों में समस्या ज्यादा होगी और अव्यवस्था भी, जिससे नई खरीदी प्रभावित हो रही है। सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल और 40 रुपए बोनस घोषित किया गया है, यानी किसानों को कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल मिलना है। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 24 अप्रैल से बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दी गई है, जबकि खरीदी की अंतिम तिथि 15 मई निर्धारित है।


समिति प्रबंधक सुरेश पटेरिया और सेल्समेन जितेंद्र अर्जरिया का कहना है कि छोटे किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके यह सरकार का निर्णय है और स्लोड बुक नही हो रहे जिससे किसान परेशान है। हालांकि, किसानों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।


वहीं गौरगाय सेवा सहकारी समिति में बारदाना (बोरी) की भारी कमी सामने आई है। यहां करीब 2400 बोरी गेहूं किसानों का खुले में पड़ा हुआ है। और ट्रैक्टरों में भी किसानों का गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है यदि पानी गिरता है तो काफी नुकसान हो सकता है, समिति प्रबंधक अयोध्या प्रसाद मिश्रा और सेल्समेन गिरिजा प्रसाद राजपूत ने बताया कि स्लॉट बुकिंग नहीं होने से खरीदी प्रक्रिया बाधित हो रही है।


किसानों का कहना है कि पिछले साल छोटे-बड़े सभी किसानों का पंजीयन हो रहा था, लेकिन इस बार नियमों में बदलाव से उन्हें नुकसान हो रहा है। कुछ किसानों ने आरोप लगाया कि व्यापारियों का गेहूं प्राथमिकता से खरीदा जा रहा है, जबकि असली किसान भटक रहे हैं।


गांवों से आए किसान पिछले कई दिनों से केंद्रों पर डेरा डाले हुए हैं। तेज धूप और मौसम की मार के बीच उन्हें अपनी फसल खराब होने का डर सता रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो उनका गेहूं बारिश में खराब हो सकता है।


हालांकि जिला प्रशासन का दावा है कि किसानों की सुविधा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन समस्याओं का समाधान कब तक करता है।