इंदौर के 'काले पानी' पर सदन में दोबारा चर्चा नहीं होगी, विजयवर्गीय बोले- "बस्ती के लोग अशिक्षित हैं"

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भोपाल (Time Special)। बजट सत्र के पांचवें दिन आज मध्य प्रदेश विधानसभा में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर भारी हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने इस विषय पर भविष्य में होने वाली किसी भी चर्चा के द्वार बंद कर दिए हैं। स्पीकर ने स्पष्ट कर दिया कि संसदीय नियमों के तहत अब इस मुद्दे पर दोबारा बात नहीं होगी।
विजयवर्गीय बोले: अशिक्षित लोगों के बीच काम करना मुश्किल
सदन में घिरे नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सरकार का बचाव करते हुए एक ऐसा बयान दे दिया जिस पर विपक्ष भड़क उठा। विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार ने तुरंत एक्शन लिया है, पाइपलाइन बदली जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई की गई है। लेकिन उन्होंने आगे कहा, यह 90 साल पुरानी बस्ती है, यहाँ अशिक्षित लोग रहते हैं जिसकी वजह से नगर निगम कर्मचारियों को काम करने में दिक्कत आती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि महापौर ने टेंडर तो किए थे लेकिन काम समय पर शुरू नहीं हो पाया।
नेता प्रतिपक्ष का तंज: जनता को काला पानी पिला रही सरकार
मंत्री के 'अशिक्षा' वाले तर्क पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जोरदार पलटवार किया। सिंघार ने कहा कि साफ पानी देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन इंदौर में जनता को 'काला पानी' पिलाकर मौत के मुंह में धकेला जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गरीब और अशिक्षित लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है?
स्पीकर का फैसला: अब नहीं होगी कोई चर्चा
विपक्ष जब इस मामले पर 'स्थगन प्रस्ताव' के जरिए विशेष चर्चा की मांग पर अड़ गया, तब स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने विधानसभा की नियमावली के नियम 55 (उपखंड 5) का हवाला देते हुए विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया। स्पीकर ने व्यवस्था दी कि चूंकि इस विषय पर सदन में पहले ही पर्याप्त चर्चा हो चुकी है, इसलिए नियमों के अनुसार अब इस मुद्दे पर दोबारा कोई चर्चा नहीं कराई जाएगी।
बहरहाल विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले के साथ ही इंदौर जल त्रासदी का मुद्दा सदन की कार्यवाही से बाहर हो गया है, जिससे विपक्ष में भारी असंतोष देखा जा रहा है।


