विजयवर्गीय की 'औकात' वाली टिप्पणी पर मध्यप्रदेश में मचा सियासी घमासान, जानिए किसने क्या कहा...?

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भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के भीतर शुरू हुआ 'जुबानी जंग' का मामला अब शांत होने के बजाय और गहराता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को 'औकात में रहने' की नसीहत देने वाले संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने बयानों के कारण सुर्खियों में हैं। जहाँ सदन के भीतर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस मामले में माफी मांगनी पड़ी, वहीं सदन के बाहर कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सदन में मुख्यमंत्री ने दिखाई विनम्रता, विजयवर्गीय ने जताया दुख
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान जब तीखी बहस हुई और मंत्री विजयवर्गीय ने उमंग सिंघार के लिए 'औकात' शब्द का इस्तेमाल किया, तो विपक्ष ने इसे आदिवासियों और सदन का अपमान बताते हुए हंगामा कर दिया। मामले को बिगड़ता देख मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद कमान संभाली और विपक्ष से विनम्रतापूर्वक माफी मांगकर विवाद को शांत करने का प्रयास किया। इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय ने भी सदन में अपने शब्दों और व्यवहार पर दुख जताया, हालांकि विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने औपचारिक रूप से माफी नहीं मांगी।
सदन के बाहर मंत्री के बेबाक तेवर: "गुस्सा आ जाता है यार..."
सदन के भीतर मामला शांत होता दिखा, लेकिन बाहर निकलते ही कैलाश विजयवर्गीय के तेवर फिर से चर्चा का विषय बन गए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बहुत ही सामान्य लहजे में कहा— "कई बार हो जाता है यार, गुस्सा आ जाता है, यह बहुत सामान्य सी बात है।" जब उनसे मुख्यमंत्री द्वारा माफी मांगे जाने पर सवाल हुआ, तो उन्होंने दोटूक कहा कि मुख्यमंत्री टीम के कप्तान हैं, अगर उन्होंने माफी मांग ली तो इसमें कुछ गलत नहीं है।
सिंघार का पलटवार और कटारे का हमला
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विजयवर्गीय के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ता के मद में चूर नेता अपनी मर्यादा भूल गए हैं। वहीं, उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने आरोप लगाया कि विजयवर्गीय ने संसदीय कार्य मंत्री के पद की गरिमा और भाषा शैली की मर्यादा को तार-तार कर दिया है।
भोपाल में मंत्री आवास का घेराव और प्रदर्शन
इधर, कांग्रेस इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं है। आज राजधानी भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के सरकारी आवास का घेराव करने के लिए कूच किया। प्रदर्शनकारी मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए कार्यकर्ताओं को रास्ते में ही बैरिकेड्स लगाकर रोक लिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा ऐसी भाषा का इस्तेमाल उनकी मानसिक स्थिति और अहंकार को दर्शाता है।
फिलहाल, इस पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया है। कांग्रेस अब इसे जनता के अपमान के रूप में प्रचारित कर पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति बना रही है।

