हेमंत बोले- पद नहीं, खून में कांग्रेस है, पीसी शर्मा ने आलाकमान को सुनाई खरी-खरी

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भोपाल (जीतेन्द्र यादव)। मध्य प्रदेश की सियासत में शुक्रवार से जारी ‘हेमंत कटारे सस्पेंस’ पर शनिवार को खुद विधायक ने विराम लगा दिया। उप नेता प्रतिपक्ष के पद से त्यागपत्र देने और अचानक ‘लापता’ होने के बाद शुरू हुई बीजेपी में जाने की अटकलों पर कटारे ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि वे कांग्रेस के सिपाही थे और रहेंगे, साथ ही सोमवार से सदन में सरकार के भ्रष्टाचार की परतें खोलने की खुली चुनौती भी दे डाली।
“कभी नेता भी इंसान होता है”: कटारे की दो टूक
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए हेमंत कटारे ने उन कयासों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें उनके बीजेपी में जाने की चर्चा थी। कटारे ने लिखा, “कांग्रेस मेरे स्वर्गीय पिताजी की विरासत है! मेरे फोन न उठाने पर भारी-भरकम कयास न लगाएं। शादी की सालगिरह पर परिवार के साथ समय बिताना मेरा संवैधानिक अधिकार है। कभी-कभी नेता भी इंसान होता है।” उन्होंने भाजपाइयों को आगाह करते हुए कहा कि वे ज्यादा खुशफहमी न पालें, क्योंकि सोमवार से वे गोमांस, भ्रष्टाचार और जनता के मुद्दों पर पूरी ताकत के साथ सदन में सरकार को ‘धोने’ का काम करेंगे।

पीसी शर्मा ने खोला मोर्चा: “सम्मान की है लड़ाई”
इससे पहले, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कटारे के इस्तीफे के पीछे की ‘अंदरूनी वजह’ को सार्वजनिक कर दिया। शर्मा ने दावा किया कि हेमंत कटारे को पार्टी के भीतर वह सम्मान नहीं मिल रहा था, जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा, “कटारे जिस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसमें वे कांग्रेस के बड़े चेहरे हैं। मैंने पहले भी शीर्ष नेतृत्व को आगाह किया था कि उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।” पीसी शर्मा ने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार से अपील की है कि वे तुरंत कटारे से बात करें और उन्हें पद पर वापस लाएं।
सदन में घमासान के संकेत
कटारे ने स्पष्ट किया है कि वे ‘पद से नहीं, जनता के विश्वास’ से ताकत लेते हैं। उनके इस बयान के बाद यह तय माना जा रहा है कि सोमवार को विधानसभा का नजारा काफी हंगामेदार होगा। जहाँ एक ओर बीजेपी इस इस्तीफे को कांग्रेस की आंतरिक फूट के तौर पर भुनाने की कोशिश करेगी, वहीं कटारे ने नए जोश के साथ वापसी का ऐलान कर विपक्ष के इरादे साफ कर दिए हैं।

