भोपाल। मध्य प्रदेश और गुजरात को जोड़ने वाली एक महत्वाकांक्षी रेल परियोजना अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां वर्षों की देरी और तकनीकी चुनौतियों के बाद अब पटरियों पर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से फाइलों और अधूरे निर्माणों के बीच अटकी इस योजना का सार अब ट्रायल रन और सुरंगों के पूर्ण होने के साथ सामने आ रहा है, जो न केवल दो राज्यों की दूरी कम करेगा बल्कि व्यापारिक दृष्टिकोण से भी एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
इंदौर से दाहोद के बीच बिछ रही यह 205 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पिछले 17 वर्षों से अधर में लटकी हुई थी, लेकिन अब पीथमपुर से धार के बीच का 55 किलोमीटर लंबा सेक्शन परीक्षण के लिए तैयार है। रेलवे प्रशासन ने इस हिस्से पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और 23 मार्च से 26 मार्च 2026 तक विशेष ट्रायल रन निर्धारित किया है। इस प्रक्रिया में टावर वैगन का उपयोग किया जा रहा है ताकि नवनिर्मित ट्रैक की मजबूती और ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन की बारीकी से जांच की जा सके। लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली यह वैगन फिलहाल ट्रैक की तकनीकी क्षमता को परख रही है, जिसके सफल होने के बाद मुख्य इंजन के साथ हाई-स्पीड ट्रायल की तैयारी की जाएगी।
इस परियोजना के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो टीही के पास बनी 2.9 किलोमीटर लंबी सुरंग इस पूरे मार्ग का सबसे जटिल हिस्सा रही है, जिसे पार करते हुए इंदौर से टीही के बीच का 21 किलोमीटर का ट्रैक पहले ही बिछाया जा चुका है। जैसे ही धार तक का यह सेक्शन पूरी तरह चालू होगा, इंदौर से मुंबई के बीच की रेल दूरी में 55 किलोमीटर की बड़ी कटौती हो जाएगी। यह बदलाव न केवल यात्रियों के समय की बचत करेगा, बल्कि पीथमपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र से माल ढुलाई को भी एक नई गति प्रदान करेगा। वर्तमान में चल रहा यह स्पीड ट्रायल इस बात का संकेत है कि दशकों पुराना इंतजार अब अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही इस रूट पर नियमित ट्रेनों का संचालन शुरू हो सकता है।



