भोपाल। राजधानी के प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) में शुक्रवार को उस वक्त अजीब स्थिति निर्मित हो गई, जब एक ओर प्रसिद्ध कथावाचक कांग्रेस की सदस्यता ले रहे थे और दूसरी ओर अचानक बिजली गुल हो गई। इस अंधेरे ने कांग्रेस को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया। आगर मालवा जिले के सुसनेर से आए लोकप्रिय कथावाचक मोहित नागर ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। संगीतमय भागवत और रामकथा के लिए मालवा अंचल में अपनी गहरी पैठ रखने वाले नागर के आने से कांग्रेस अब आध्यात्मिक कार्ड खेलने की तैयारी में दिख रही है।


अंधेरे में प्रेस कॉन्फ्रेंस: बिलों पर तंज

जैसे ही जीतू पटवारी ने मोहित नागर को पार्टी का दुपट्टा पहनाया और मीडिया से बात शुरू की, वैसे ही बिजली कट गई। पटवारी ने तंज कसते हुए कहा कि यह प्रदेश की असल तस्वीर है। सरकार 24 घंटे बिजली का ढिंढोरा पीट रही है, जबकि हकीकत यह है कि बिजली आए न आए, भारी-भरकम बिल जरूर आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लाडली बहनों को एक हाथ से 1500 रुपये दे रही है और दूसरे हाथ से 3000 रुपये का बिजली बिल थमाकर उनकी कमर तोड़ रही है। पटवारी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी के मुद्दों पर भी सरकार को विफल बताया।


कथावाचक का 'शबरी' वाला दांव

कांग्रेस में शामिल होने के बाद मोहित नागर ने आदिवासियों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए एक बड़ा आध्यात्मिक संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह मां शबरी को भगवान राम का लंबा इंतजार करना पड़ा था, उसी तरह आज भी समाज के कई वर्गों को अपने हक का इंतजार है। नागर की लोकप्रियता और उनके वायरल भजनों का लाभ उठाकर कांग्रेस मालवा की उन सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, जहाँ धार्मिक और सामाजिक समीकरण निर्णायक होते हैं।


मालवा की बिसात पर नया चेहरा

मोहित नागर केवल एक कथावाचक नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर एक प्रभावशाली व्यक्तित्व भी हैं। उनके कांग्रेस में आने से भाजपा के 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के एजेंडे को टक्कर देने की रणनीति साफ झलक रही है। अब देखना यह होगा कि क्या कथावाचक के स्वर कांग्रेस के लिए चुनावी वैतरणी पार करने में सहायक सिद्ध होंगे या 'शबरी' जैसा लंबा इंतजार अभी बाकी है।