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गर्भगृह में कौन जाएगा, यह फैसला मंदिर प्रशासन का, कोर्ट इसमें दखल नहीं देगी

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27 जनवरी 2026, 02:00 pm IST
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उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से साफ कहा कि महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं होता और गर्भगृह में कौन जाएगा, यह फैसला मंदिर प्रशासन को ही करना है, कोर्ट इसमें दखल नहीं देगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अपनी मांग मंदिर प्रशासन के सामने रखें।


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि महाकाल के सामने सब बराबर हैं, कोई विशेष दर्जा वाला नहीं होता। गर्भगृह में प्रवेश का नियम तय करने का अधिकार मंदिर कमेटी और जिला प्रशासन के पास है, कोर्ट इसमें क्यों हस्तक्षेप करे? याचिकाकर्ता का आरोप था कि गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश बंद है, लेकिन इस दौरान वीआईपी और प्रभावशाली लोगों को नियम तोड़कर अंदर जाने की इजाजत है। उनका कहना था कि यह नियम संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है।


इससे पहले अगस्त 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भी इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि गर्भगृह में प्रवेश का फैसला उज्जैन के जिला कलेक्टर और महाकाल मंदिर प्रशासक को ही करना है। महाकाल मंदिर में कोरोना काल के बाद से गर्भगृह में आम दर्शन बंद हैं। श्रद्धालु बाहरी क्षेत्र से ही भगवान महाकाल के दर्शन करते हैं। हालांकि कई बार वीआईपी नेता और प्रभावशाली व्यक्तियों को गर्भगृह में प्रवेश दिया जाता है, जिससे आम भक्तों में नाराजगी है।

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