भोपाल। कहते हैं कि दूसरों के घरों पर पत्थर फेंकने वाले, अक्सर अपने घर की खिड़कियां कांच की भूल जाते हैं... यह कहावत आज मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है। सूबे की सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर रोज कटघरे में खड़ा करने वाले पटवारी, आज अपने ही भाई की वजह से बैकफुट पर आ गए हैं। उनके सगे भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी का नाम एक बड़े ड्रग्स नेटवर्क में आने के बाद से मध्य प्रदेश की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है।
इसी बीच कुछ और जानकारी सामने आई जो बेहद गंभीर और चौंकाने वाली है। दरअसल जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी महज़ एक ड्रग्स मामले में नहीं फंसे हैं, बल्कि वे एक आदतन अपराधी हैं जिन पर पहले से ही हत्या के प्रयास, दंगा भड़काने, और महिला उत्पीड़न जैसे कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने जहाँ जीतू पटवारी को चौतरफा घेर दिया है, वहीं मध्य प्रदेश में अपनी खोई हुई साख वापस पाने की कोशिश कर रही कांग्रेस पार्टी की विश्वसनीयता को भी भारी झटका लगा है। पार्टी के अंदर और बाहर, दोनों तरफ से अब जीतू पटवारी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
यह है नाना पटवारी के मुकदमों की पूरी कुंडली
नाना पटवारी के खिलाफ दर्ज मुकदमों की आधिकारिक सूची और अपराध क्रमांक (केस हिस्ट्री) से साफ है कि उनका आपराधिक रिकॉर्ड बेहद पुराना और संगीन है:
- अपराध क्र. 632/2012: साल 2012 में दंगा और बलवा करने के आरोप में पहला बड़ा मामला दर्ज हुआ।
- अपराध क्र. 91/2015: साल 2015 में मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक अपमान करने के तहत मामला दर्ज किया गया।
- अपराध क्र. 312/2017: वर्ष 2017 में हत्या का प्रयास, दंगा भड़काने और आगजनी करने जैसी संगीन धाराओं में केस दर्ज हुआ।
- अपराध क्र. 313/2017: इसी साल हथियारों के साथ दंगा करने का एक और गंभीर मामला दर्ज किया गया।
- अपराध क्र. 314/2017: दंगा, मारपीट, आम नागरिकों को धमकी देने और रास्ता रोकने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई।
- अपराध क्र. 316/2017: वर्ष 2017 में ही हत्या का प्रयास करने और ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी पर जानलेवा हमला करने का केस दर्ज हुआ।
- अपराध क्र. 782/2018: साल 2018 में एक महिला से सरेआम छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न करने का बेहद शर्मनाक मामला दर्ज किया गया।
- अपराध क्र. 957/2023 और 1225/2023: विधानसभा चुनाव के समय वर्ष 2023 में दंगा करने, गाली-गलौज और अशांति फैलाने के दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए।
हर मुद्दे पर बोलने वाले पटवारी क्यों हैं मौन?
भाई के इस खौफनाक आपराधिक इतिहास और नए ड्रग्स सिंडिकेट में नाम आने के बाद कांग्रेस के भीतर भी बगावती सुर उठने लगे हैं। आम लोग और कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता अब खुलकर यह पूछ रहे हैं कि जो जीतू पटवारी प्रदेश के हर छोटे-बड़े मुद्दे पर सरकार को घेरते हैं, कानून-व्यवस्था पर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वे अपने सगे भाई के इस काले रिकॉर्ड पर पूरी तरह चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि नशा माफिया और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोपों से घिरी कांग्रेस के लिए आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। विपक्ष में बैठी पार्टी के लिए अपने ही अध्यक्ष के परिवार का यह आपराधिक सच जनता के बीच उसकी बची-कुची विश्वसनीयता को भी पूरी तरह खत्म कर सकता है।




