छतरपुर। शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जानराय टोरिया में इन दिनों प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का महाकुंभ चल रहा है। देश की इकलौती अष्टधातु की 51 फुट की विशाल श्री हनुमान की प्राण प्रतिष्ठा करने के उद्देश्य से महोत्सव की शुरुआत की गई है। 9 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव के पहले दिन भव्य और विशाल शोभा यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। 108 महिलाएं विशेष श्रृंगार के साथ सर पर कलश रखकर शोभायात्रा में चल रही थी वहीं शोभायात्रा का 51 से अधिक स्थानों पर अद्भुत स्वागत हुआ।


जानराय टौरिया के मीडिया प्रभारी लोकेश चौरसिया ने बताया कि सुबह करीब 11बजे मोटे के महावीर मंदिर प्रांगण से शोभायात्रा की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। 108 श्रद्धालु महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर यात्रा की शोभा बढ़ाई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी इन महिलाओं ने श्रद्धा और आस्था का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। यह शोभायात्रा छत्रसाल चौक, महल रोड, चौक बाजार, फब्बारा चौक से होते हुए आयोजन स्थल तक पहुंची। यात्रा में आकर्षक झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। सजीव झांकियों में सनातन संस्कृति से जुड़े प्रसंगों का सुंदर चित्रण किया गया जो बग्घियों पर सवार होकर नगर भ्रमण कर रही थीं। इसके साथ ही साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक पवित्र बना दिया। यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का भी संदेश दिया। इस अवसर पर 102 वर्षीय महात्मा राजाराम आचार्य, जानराय टौरिया के महंत श्रृंगारी महाराज क्षेत्रीय विधायक ललिता यादव, कांग्रेस की कार्यकारी जिला अध्यक्ष दीप्ति पांडे सहित देश भर से बड़ी संख्या में आए साधु संत और धर्म प्रेमी शामिल हुए।


बेटियों ने दिखाया शौर्य, ढोल की थाप पर चलाई तलवार, हुआ सम्मान

शोभायात्रा के दौरान बेटियों ने भी अपना अद्भुत शौर्य प्रदर्शन किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच उन्होंने तलवारबाजी का प्रदर्शन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दृश्य ने नारी शक्ति और साहस का सशक्त संदेश दिया। अपने शौर्य का प्रदर्शन करने वाली प्रताप नवयुवक संघ एवं सोनी समाज की बेटियों को महंत जी की ओर से सम्मानित किया गया। पूरा नगर जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़, भक्ति गीतों की मधुर धुन और अनुशासित व्यवस्था ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।