छिंदवाड़ा,जीशान अंसारी। इंसान की असली पहचान उसके जाने के बाद भी याद किए जाने से होती है। चंदनगांव निवासी 55 वर्षीय सुरेंद्र मानकर ने यही साबित कर दिया। सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने के बाद भी उन्होंने पांच लोगों को नया जीवन देकर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जो हमेशा याद रखी जाएगी। बताया जाता है कि सुरेंद्र मानकर रोज की तरह अपना काम खत्म कर घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक तेज रफ्तार बाइक सवार ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में नागपुर रेफर किया गया। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। यह पल परिवार के लिए बेहद दुखद था, लेकिन इसी दुख के बीच सुरेंद्र के परिजनों ने एक ऐसा निर्णय लिया, जिसने कई जिंदगियों को रोशन कर दिया। पत्नी ललिता मानकर और बेटों गगन व वेदांत ने साहस और संवेदनशीलता दिखाते हुए अंगदान के लिए सहमति दी। डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक सुरेंद्र का लिवर, दोनों किडनी और नेत्र निकालकर जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित किए। इस महान निर्णय से एक मरीज को नया जीवन मिला, दो लोगों को किडनी फेलियर जैसी गंभीर समस्या से राहत मिली, जबकि दो नेत्रहीनों की दुनिया फिर से रोशन हो गई। इस पहल ने न केवल पांच परिवारों में खुशियां लौटाई, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि अंगदान से बड़ी कोई सेवा नहीं। दुख की इस घड़ी में भी मानकर परिवार ने जो साहस दिखाया, वह हर किसी के लिए प्रेरणा है।