भोपाल। भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम (पाकिस्तानी नागरिक) द्वारा बेची गई करोड़ों रुपये की संपत्तियों के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने अपनी जांच तेज कर दी है। इस जांच के घेरे में अभिनेता सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा अली खान और शर्मिला टैगोर समेत पूरा पटौदी परिवार आ गया है। मामला करीब 1,370 एकड़ जमीन और उसे 'शत्रु संपत्ति' (Enemy Property) घोषित किए जाने से जुड़ा है।


ताजा घटनाक्रम और साक्ष्य प्रस्तुत

शिकायतकर्ता को बुलावा: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और EOW महानिदेशक को भेजी गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए EOW भोपाल ने समाजसेवी अमिताभ अग्निहोत्री को पूछताछ के लिए बुलाया। उन्होंने अपने अधिवक्ता प्रशांत पांडे के साथ डीएसपी EOW के समक्ष लिखित साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत किए। भोपाल के कोहेफिजा, नयापुरा, हलालपुर, बेहटा और बोरबन इलाकों में स्थित नवाबी प्रॉपर्टीज पर कानूनी पेंच फंसा हुआ है।


पाकिस्तानी नागरिकता और शत्रु संपत्ति का मामला

नवाब हमीदुल्लाह खान की बड़ी बेटी के पाकिस्तान चले जाने के कारण उनकी संपत्ति कानूनी रूप से 'शत्रु संपत्ति' के दायरे में आती है। आरोप है कि आफताब जहां बेगम के पाकिस्तान निवासी होने के तथ्य को छिपाकर जमीनों के सौदे किए गए। वर्ष 1959 के राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, उनके नाम बेहटा में ~655 एकड़ और बोरबन में ~102 एकड़ जमीन दर्ज थी। 31 मई 1994 को उन्होंने बेहटा की 30.55 एकड़ भूमि एक सहकारी समिति को मात्र ₹30.55 लाख में बेच दी थी।


सैफ अली खान से मूल दस्तावेजों की मांग

शिकायत में मांग की गई है कि पटौदी परिवार (सैफ अली खान व शर्मिला टैगोर) से विलय से जुड़े मूल दस्तावेज मांगे जाएं। इनमें शामिल हैं: 29 अप्रैल 1949 को बी.पी. मेनन द्वारा हस्ताक्षरित नक्शे। 30 अप्रैल 1949 का 'मर्जर एग्रीमेंट' (Merger Agreement)। 1 जून 1949 से पूर्व बनी नवाब की संपत्ति सूची की मूल प्रतियां।


अतिरिक्त 1,984 एकड़ भूमि का रहस्य

पूर्व भोपाल रियासत के 2,556 गांवों में नवाब परिवार की जमीनों की जांच की मांग की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, मर्जर एग्रीमेंट में जहाँ 1,395 एकड़ भूमि दर्ज थी, वहीं 9 गांवों में 1,984.13 एकड़ अतिरिक्त भूमि नवाब परिवार के नाम कैसे दर्ज हुई और इसे कैसे बेचा गया, इसकी गहन जांच की जा रही है।


कस्टोडियन विभाग की कार्रवाई की समीक्षा

कस्टोडियन विभाग मुंबई (2021) और भोपाल कलेक्टर (2022) द्वारा नवाब की संपत्तियों को आधिकारिक रूप से 'शत्रु संपत्ति' दर्ज करने के निर्देशों पर पिछले चार सालों में हुई प्रशासनिक कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा गया है।