भोपाल,जीतेंद्र यादव। सम्राट अशोक प्रौद्योगिकी संस्थान (एसएटीआई), विदिशा में एरियर और ग्रांट भुगतान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इस मामले में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे न सिर्फ कॉलेज प्रशासन बल्कि शासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
आरोप लगाने वाले चेतन सिंह राजपूत ने कहा है कि संस्थान में एरियर भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और कई पात्र कर्मचारियों को उनका हक नहीं दिया गया। वहीं, कुछ ऐसे लोगों को लाभ देने का प्रयास किया गया, जो नियमों के तहत इसके हकदार नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि कई कर्मचारियों का एरियर तैयार ही नहीं किया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
राजपूत के अनुसार, सबसे गंभीर गड़बड़ी 89 दिनों की अल्पकालिक सेवा को नियमित सेवा मानकर भुगतान की गणना करने में हुई है। इसके अलावा 1 अप्रैल 2000 के बाद नियमित हुए कर्मचारियों को भी एरियर का लाभ दिए जाने का मामला सामने आया है, जो नियमों के विरुद्ध बताया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्वीकृत पदों की स्थिति और पात्रता से जुड़े नियमों को दरकिनार कर कुछ लोगों को आर्थिक फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
इस पूरे मामले ने संस्थान की वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। राजपूत ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, संदिग्ध भुगतानों पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मामला सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि शासन इस पर कब और क्या कदम उठाएगा। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह विवाद और गहरा सकता है और अन्य शासकीय संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें सरकार की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं

